Monday, 8 February 2021

निदान

भारत और वेस्टइंडीज के मध्य क्रिकेट का मैच चल रहा था और ऋत्विक जो कि क्रिकेट का ना मात्र शौकीन था अपितु अपने महाविद्यालय की क्रिकेट टीम का एक खिलाड़ी भी की आँखें टी.वी. स्क्रीन पर गड़ी हुई थी। वह भारत की वॉलिंग एवं वेस्टइंडीज की बैटिंग बड़े गौर से देख रहा था...। भारत की बॉलिंग और फील्डिंग पर वह बार-बार मोहित हुआ जा रहा था। उसे टीम के प्रत्येक सदस्य का तालमेल लुभा रहा था तो वेस्टइंडीज की बिखरी–बिखरी बैटिंग पर वह भीतर ही भीतर क्रोधित हो रहा था...।

वेस्टइंडीज के लगातार चार खिलाड़ियों के आउट होते ही उसके मुँह से अकस्मात् निकला,-"इस टीम का हार तो निश्चित है।"

बगल में बैठे उसके छोटे भाई ने कहा,-"अभी तो बैटिंग हेतु उनके खिलाड़ी बाकी हैं..। अभी से ही भैया आप ऐसा कैसे कह सकते हैं..?"

"छोटे! तू नहीं समझेगा... जहाँ बिखराव हो वहाँ हार निश्चित है... भारत ने बॉलिंग एवं फील्डिंग की तरह ही यदि आपसी तालमेल से बैटिंग की तो उनकी जीत निश्चित है।"

"हूँह.. ये.. तो है भैया!"

अपनी बात के साथ ही ऋत्विक के मन–मस्तिष्क में अंकित होने लगे नित्य प्रतिदिन के आपसी लड़ाई-झगड़े... अभी वह इन मानसिक उलझनों में उलझ सुलझ ही रह था कि बाहर से सबसे छोटा भाई रोते हुए दाखिल हुआ,-"भैया! मोहल्ले के हातिम और उसके भाई ने मिलकर मुझे पीटा है...।" इतना कहते हुए वह अपने कमरे में चला गया।

उसके मुँह से अकस्मात् निकला,-"अब मेरा कोई भाई या किसी और का भी भाई ऐसे रोता नहीं आएगा.. हम सब भाई आपस में प्यार-मोहब्बत से मिलकर उदाहरण बनकर रहेंगे और किसी भी समस्या का समाधान मिलकर करेंगे।"

12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज सोमवार 08 फरवरी को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. असीम शुभकामनाओं और सस्नेहाशीष के संग हार्दिक आभार आपका छोटी बहना

      Delete
  2. सार्थक सन्देश देती प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (9-2-21) को "मिला कनिष्ठा अंगुली, होते हैं प्रस्ताव"(चर्चा अंक- 3972) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    ReplyDelete
    Replies
    1. असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार आपका

      Delete
  4. सुंदर सन्देश देती रचना।

    ReplyDelete
  5. वाह!विभा जी ,सुंदर संदेश देती हुई रचना .

    ReplyDelete
  6. बहुत ही सुन्दर संदेश पूर्ण रचना, बच्चों के लिए अति सारगर्भित कथा..

    ReplyDelete
  7. सटीक संदेश देती लघुकथा है आदरणीया विभा दी।

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

चालाकी कि धूर्तता

लघुकथा लेखक द्वारा आयोजित 'हेलो फेसबुक लघुकथा' सम्मेलन का महत्त्वपूर्ण विषय 'काल दोष : कब तक?' था। आमंत्रित मुख्य अतिथि महोद...