Monday, 2 July 2012

# नैनीताल का नज़ारा #


Golph Ground के नज़ारे का आनन्द उठाना हो तो ढ़ाई से साढ़े छ: बजे तक ना जाएँ ....चोट लगने का डर सताता  रहेगा .... !!










बारिश का मौसम है   .... (^_^)
शाम भी रूहानी है  .... (^_^)
तो बातें भी रूमानी हो   .... (^_^)
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जब – जब ,
मेरे चेहरे को सहला कर , 
चमकाती है ,
बारिश की बुँदें ….
लगता है सारा जहाँ ,
मेरे मुट्ठी में है ….
कितने गहरे छलके हैं ,
शाम के साए में क्षितिज  के रंग  ....
उन रंगों से ,
अपने रंगहीन अतीत में ,
रंग भरना चाहती हूँ ....
 जैसे ….
रवि ,अवनी के ,
आगोश में पनाह लेता ,
शाम के साए में ....
वैसे ही  ….
बदन , जिस्म से मिल जाए ....  
उन्हें अपने बाहों में जकड़े रहूँ , 
और सज-संवर जाए जीवन की शाम ....
उन्हें बताना चाहती हूँ ....
नभ में चमकता शाम का अकेला तारा ,  
मेरे नुरानी प्रेम का प्रतिरूप है ....
वे आभास दें सुनने का ,मेरे विचारों को ....
रूपहले ख्यालों को …. धुंधलाए अहसासों को .... 
अपने प्रियतम के आलिंगन में सिमटना चाहती हूँ .... !!



8 comments:

  1. Rumani Vatavaran Main Ruhani Thouths....

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  2. बहुत सुन्दर...............

    भीगी भीगी सी रचना.....

    सादर
    अनु

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  3. बारिश की बूँदें जब गिरती लगता जहाँ हमारा है,
    शाम ढले क्षितिजो के संग प्रियतम मेरा सहारा है......

    MY RECENT POST...:चाय....

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  4. प्रेम में पगी ... भावमय रचना ..

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  5. आपने भी क्या खूब ,ये पंक्तियां पढवाई हैं
    सुंदर शब्दों का चयन , संयोजन कर के लाई हैं
    बहुत बहुत शुभकामनाएं ।
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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  6. इस रचना के लिए आभार...

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आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

अभिविन्यास

 "अद्धभुत, अप्रतिम रचना। नपे तुले शब्दों में सामयिक लाजवाब रचना। दशकों पहले लिखी यह आज भी प्रासंगिक है। परिस्थितियाँ आज भी ऐसी ही हैं। ...