Friday, 23 August 2019

यक्ष प्रश्न

*मुरलीधर द्वापर में बड़े-बड़े लीला करने वाले।*
*कमलनाथ हर क्षण कृष्णा का साथ देने वाले।*
*सास-ननद का रूप बदल जाओ या सम्बोधन,*
*निर्गुण तुम्हें ढूंढ रहे अज्ञानी सर्वेश्वर बनने वाले।*

बीते कल गुरुवार 22 अगस्त 2019 देर रात जगी रही कि रात बारह बजे के बाद 23 अगस्त होगा और मुझे कुछ अच्छा लिखना है... (समय व्यतित करने के लिए व्हाट्सएप्प समूह/फेसबुक उत्तम सहारा) लेकिन

[22/08, 11:37 pm] गोपी उवाच :- अभी-अभी मेरी देवरानी का फोन आया , बातों-बातों में वो बता रही थी कि वो राखी में ननद के घर पर थी। कुछ दिनों के बाद भगनी का जन्मदिन था तो ठहर गई थी। उसी बीच किसी दिन शाम के नाश्ते में समोसा आया तो समोसा के साथ सबलोग कच्चा प्याज खाते हैं यह सोचकर देवरानी बारीक छोटा-छोटा प्याज काट कर ले आई.. ननद बोली कि ऐसे थोड़े काटा जाता है मैं फिर से काट कर लाती हूँ पतला ही लम्बाई में.. देवरानी बोली भी कि कट गया है तो ऐसे ही खा लेंगे लोग तो क्या हो जाएगा.. ? तो ननद दाँत पिसते हुए बोली कि आपलोगों को खाना ही बनाने में मन नहीं लगता है और ना घर ठीक रखने में.. देवरानी दुखी हुई कि एक तो ननद छोटी दूसरे उनके घर पर मेहमान थी..
[22/08, 11:42 pm] राधा रानी : ये सास ननद लोग ऐसा क्यों करते हैं समझ नीं आता🤦‍♀🤦‍♀
[22/08, 11:43 pm] गोपी : अरे! इतनी रात तक जगी हो 🤣
[22/08, 11:46 pm] राधा रानी: जी
कल सास-ससुर आ रहे हैं..
[22/08, 11:48 pm] राधा रानी : अभी सामान प्रोपर वे में सेट भी नहीं हुआ..। सोचा था दो छुट्टी में इनके साथ मिलकर मार्केट का सामान और इलेक्ट्रिसिटी वाले के काम और दूसरे कुछ काम निपट जायेंगे..।
[22/08, 11:49 pm] गोपी : "इतनी रात इसी चिंता में जगी हैं क्या... सो जाइये... समय पर सब होता रहेगा..,"
[22/08, 11:50 pm] गोपी : ना कोई अतिथि आ रहे और ना उम्र रहा ये सब सोचने के लिए
[22/08, 11:52 pm] राधा रानी : अरे दीदिया आप नहीं जानती
हर चीज को देखकर कुछ न कुछ बोलना ही होगा... पुराने जमाने वाले सास ससुर न🙊🙊
आजकल वाले सास ससुर तो कुछ न कहते उलटा लाड लड़ाते बहुओं से😊😊
[22/08, 11:55 pm] राधा रानी : एक बार प्रोपर वे में सैट हो जाते न फिर आते तो टेंशन न होती... खैर आने दीजिए घर है उनका बहुओं का तो काम ही है सुनना... दो कान इसिलिए दिये न भगवान ने🤣🤣
[22/08, 11:55 pm] गोपी : केवल पुराने ज़माने के सास-ससुर की बात नहीं है बहुये भी उसी तरह की हैं चिंता करने वाली बातें दिल पर लेने वाली... अरे बेटे के माँ-बाप हैं । बहू को इंसान नहीं समझना है , ना समझें लेकिन  बहू तो खुद को इंसान समझ ले.. ना तो वह रोबट है और ना फरिश्ता
[22/08, 11:57 pm] गोपी : साधु के तोता बन अपनी तबीयत खराब ना कर लेना.. दो कान हैं तो दो कान का पूरे अच्छे से इस्तेमाल हो.. 😜🤭
[22/08, 11:58 pm] राधा रानी: "आपकी अंतिम पंक्ति को काश वो ही लोग समझ लेते तो कितना अच्छा होता... खैर हमही खुदको समझायेंगे ये लाईन बल्कि घोटकर पीने की चेष्टा करेंगे"😄
[22/08, 11:59 pm] राधा रानी : 🤣🤣🤣🤣कोशिश तो यही रहेगी पर फितरत किधर बदलती पर कोशिश शिद्दत से जारी है फितरत बदलने की.. शुभ रात्रि..!"
मैं रात भर सोचती रही कि सच में कब से रात्रि शुभ होने लगेगी...

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर और रोचक..शुभ रात्रि की जगह शुभ दिन हो गया होगा सोते सोते:-) कृष्ण जन्माष्टमी की अनन्त शुभ कामनाएं दीदी !

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  2. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-08-2019) को "बंसी की झंकार" (चर्चा अंक- 3437) पर भी होगी।


    --

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….

    अनीता सैनी

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    1. सस्नेहाशीष संग शुक्रिया बहना

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  3. बढिया और रोचक संवाद।

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  4. जय मां हाटेशवरी.......
    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    25/08/2019 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में......
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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    1. सस्नेहाशीष संग हार्दिक आभार आपका

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  5. नारी मन की वेदना से भीगा भावपूर्ण और मार्मिक संवाद | वो सुबह कभी तो आयेगी | सादर

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अभिविन्यास

 "अद्धभुत, अप्रतिम रचना। नपे तुले शब्दों में सामयिक लाजवाब रचना। दशकों पहले लिखी यह आज भी प्रासंगिक है। परिस्थितियाँ आज भी ऐसी ही हैं। ...