शहर के एक प्रसिद्ध महाविद्यालय में वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी चल रही थी। समर और उसके दोस्तों ने महीनों रात-दिन एक करके 'स्मार्ट विलेज' का एक बेहतरीन वर्किंग मॉडल तैयार किया था। पूरा महाविद्यालय उनकी तारीफ कर रहा था। शाम को जब नतीजों की घोषणा होने वाली थी, तब महाविद्यालय के ट्रस्टी के बेटे, रोहन, ने समर को अकेले में बुलाया। रोहन ने टेबल पर पैसों से भरा एक लिफाफा रखा और कहा, "समर, इस प्रोजेक्ट पर मुख्य नाम मेरा और मेरे दोस्तों का रहेगा। तुम बस बैकस्टेज रहना। इस पैसे से तुम अपनी पूरे साल की फीस भर सकते हो और वैसे भी, तुम्हें आगे इंटर्नशिप के लिए मेरी सिफारिश की ज़रूरत पड़ेगी ही।"
समर एक बेहद साधारण परिवार से था। उसके पिता ने उसकी पढ़ाई के लिए अपनी पुश्तैनी ज़मीन का एक हिस्सा बेच दिया था। रोहन की बात सुनकर समर के भीतर एक गहरा द्वंद्व छिड़ जाना स्वाभाविक हो गया! एक तरफ आर्थिक सुरक्षा और भविष्य का रास्ता था, तो दूसरी तरफ उसकी महीनों की मेहनत और उसका स्वाभिमान।
वह भारी कदमों से पुस्तकालय की तरफ चला गया। वहाँ दीवार पर महापुरुषों के सुविचार लिखे थे। अचानक उसकी नज़र एक पुरानी डायरी के पन्ने पर पड़ी, जिस पर किसी ने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था :-
“आप अपने सम्मान की रक्षा नहीं करते हैं तो मर जाते हैं और मरी आत्मा से आप शव होते हैं-”
इन शब्दों ने समर के भीतर जैसे एक बिजली का करंट दौड़ा दिया। उसे अपने पिता का वह चेहरा याद आया, जिन्होंने तंगी में भी कभी किसी के सामने अपना सिर नहीं झुकाया था। “अगर आज मैंने अपने स्वाभिमान का सौदा कर लिया, तो मैं खुद की ही नज़रों में हमेशा के लिए गिर जाऊँगा! तब तो मैं केवल एक ज़िन्दा लाश बनकर रह जाऊँगा!” समर लगातार बुदबुदाने लगा।
नतीजों की घोषणा का समय हो गया था, मुख्य अतिथि माइक पर आए और बोले, "इस साल का बेस्ट प्रोजेक्ट अवॉर्ड जाता है—रोहन और उनकी टीम को!"
पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। रोहन स्टेज की तरफ बढ़ने लगा। तभी समर अपनी सीट से खड़ा हुआ और उसने ज़ोर से कहा, "रुकिए!"
हॉल में सन्नाटा छा गया।
"सर, यह प्रोजेक्ट रोहन का नहीं, मेरा और मेरी टीम का है। रोहन ने इसे पैसों के दम पर खरीदने की कोशिश की है। मेरे पास इस प्रोजेक्ट के कोडिंग लॉग्स, शुरुआती डिज़ाइन्स और हर एक स्टेज के वीडियो प्रूफ हैं, जो साबित कर देंगे कि इसे किसने बनाया है।" समर मंच पर गया और मुख्य अतिथि से सीधे मुखातिब होकर कहा।
"तुम जानते हो तुम किससे बात कर रहे हो? तुम्हारा करियर बर्बाद हो सकता है।" ट्रस्टी ने समर को डराने की कोशिश की।
"सर, करियर फिर बन सकता है, लेकिन बिका हुआ आत्मसम्मान कभी वापस नहीं आता।" समर ने मुस्कुराकर कहा,
समर के हौसले और पुख्ता सबूतों के आगे कॉलेज प्रशासन को झुकना पड़ा। जाँच हुई और अवॉर्ड समर की टीम को मिला।
रात को जब समर अपने हॉस्टल के कमरे में लौटा, तो बिजली कटी हुई थी। उसने मेज़ पर एक छोटा सा मोम का दीया जलाया। हवा के झोंकों के बीच भी वह दीया पूरी ताकत से जल रहा था। समर ने उस दीये की लौ को देखा और मुस्कुरा दिया— “आज मैंने अपने भविष्य की ही नहीं, बल्कि अपनी आत्मा की भी रक्षा की है।” समर बुदबुदाते हुए कहा। वह भी दीये में बची लौ की तरह, विपरीत परिस्थितियों में भी शान से प्रज्वलित हो रहा था।
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