अमराई में
तोता का कलरव—
युद्ध विराम
ढोल का शोर
भगोड़ा का बजाया—
युद्ध विराम
युद्ध विराम—
भगौड़ा का उकेरा
इन्द्रधनुष
नभ में छाए
पतंग व पतंगी—
युद्ध विराम
ग़ज़ल
कुछ नहीं वक़्त का ही तकाज़ा तो है,
ग़म पुराना सही दर्द ताज़ा तो है।
टूटकर बिखरे रिश्ते कई बार पर,
दिल में जुड़ने का कोई इजाज़ा तो है।
रात भर अश्क आँखों से बरसे मगर,
दूर होकर भी मेरा वो ख़्वाजा तो है।
ख़्वाब सारे बिखर कर हुए धूल भी,
आँख पर एक सपने का क़ब्ज़ा तो है।
वो न आएँ कभी, कोई शिकवा नहीं,
दिल का बाक़ी अभी वे ही राजा तो है।
लोग पढ़ते नहीं दिल के मजमून को,
मीर के लेख का यह नतीजा तो है।
ये अंधेरा भी छँट जाएगा देखना,
आस के आसमाँ में वो इक जा तो है
आज हर ओर है बेयक़ीनी, विभा,
कल सँवरने का अंदाज़ दूजा तो है।
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