Monday, 2 September 2013

हाइकु

यहाँ कार्यशाला इवेंट्स में हाइकु लिखने के लिए आधार शब्द जैसे हम लेते हैं.. इस इवेंट में भी होगा..

पर इस बार एक चेलेंज.. बड़े वाला.. हर हाइकु के लिए आपको शब्द खुद तय करना है.. उसे आप हाइकू के नाम या शीर्षक के तौर पर लिखें..

पर पर पर.. वो शब्द हाइकु में नहीं आना चाहिए.. मतलब जिस शब्द को आप आधार बना रहे हैं.. वो सिर्फ अपना अर्थ या भाव या पहचान दिखाए हाइकु में.. खुद ना दिखे.. !
~~~~~~~~~~~~~~~~~
ये हमे चुनौती मिला है
कितना सफल है आप बताएं

~~ 1

Vibha Shrivastava's photo.

छेद दे काठ
कैद हो पंखुरी में
इश्क ये कैसा

~~2



अंक समाये
क्षुधा तृप्त हो जाए
ईश्वर साध

~~3



है व्यथा ग्रस्त
वेदना है आनंद
प्रफुलित है

~~4



चुनी वेदना
है प्रकृति स्वरुपा
अतुलनीय

~~5


खोल दे आंखे
बन जाता महान
दे शब्द ज्ञान

~~6


साथ मिले तो
मुक्त पापाचरण
गुप्तरूप (गुप्त हस्त)से

~~7


है देश हठ 
उनका ही भविष्य ,
वे बनाते हैं 

~~ 8



 हेम सा हेम
निर्वाण प्राप्त किया
तृष्णा का त्याग

~~9



 अनूठा शिष्य
दिया हंस दक्षिणा
हाथ का अँगूठा

~~


Sunday, 1 September 2013

शिक्षा प्रसार करें


teachers day greeting cards free download

~~ 1
ज्ञानदाता का
शिक्षक औ ईश्वर 
दो स्वरूप है 
~~ 2
पथ प्रहरी (पथदर्शक)
मिटा दे अंधकार
अज्ञानता का 
~~ 3
संत हो गुरु 
विवेकानंद जैसा 
हो अलौकिक 
~~ 4
ना हुआ कोई
कूटनीत शिक्षक 
चाणक्य सा 
~~ 5
मन पढ़ता 
गुरु-शिष्य का रिश्‍ता
दिशा गढ़ता 
~~ 6
कोरा स्लेट 
शिशु स्कूल पहुंचा    
जो चाहो लिखो
~~ 7
मशि कागज़
प्यारे हुये जिसके
वो प्यारा हुआ 
~~ 8
सख्त अक्खड़ 
गुरु-शिष्य रिश्ता पे
दाग लगाते
~~ 9
भारत गुरु 
धर्म-कर्म-शून्य का 
बता महत्व
~~ 10
प्रतिदान  है   
शिक्षा है महादान
है शास्त्रोक्ति 
~~ 11
किया जिसने
शिक्षक का सम्मान
बना इंसान
~~

Teachers Day songs

सब शिक्षित
शिक्षा प्रसार करें
लिया है तो दें
~~




Thursday, 29 August 2013

सुखद संजोग है ....




ये मुझे मिला Google की तरफ से
Thank U Google .... thank U so much Google

आश्चर्य में हूँ
शुक्रिया धन्यवाद
आभारी भी हूँ

~~~~

देख लो कान्हा
सुखद संजोग है
जन्मे भादों में
मैं - तुम ,इसलिए
मिली रात कारी है
फैला दिल में
उजास ही उजास
मिली बधाई
तुम्हें है तो मुझे भी
कल की बात
रात खुशगवार
बनाई अपनों ने

~~~~~~~


Wednesday, 28 August 2013

शुभकामना अष्टमी रोहणी की



5239
पाँच हजार
दो सौ उनचालीस
के हुये कान्हा
जब वे पैदा हुये
आज वही है
तिथि दिन नक्षत्र
कृष्ण जन्म के
हैं परम नियंता
भक्तों के पक्षधर ....

तिथि = अष्टमी
दिन = बुधवार
नक्षत्र = रोहणी

!!
~~

शुभकामना
अष्टमी रोहणी की
जन्मे गोपेश
बलकर वर पा
बहुक्षम ही बनें !!
~~

मूल उद्गम
अतीव आकर्षक
हुई असंख्य
ब्रह्मांडों की सृष्टि
माधव शरीर से
~~

गोपी वल्लभ
हो असुरदमन
ओ बंधू मोरे
~~

गोपी छकाया
वस्त्रपहरकाया
वस्त्र छिपाया
~~

प्रेमप्रतिज्ञ
 सिरमौर्य चढ़ाया
प्रिया चरण
~~

 वध किये तो
मोक्षदाता हैं कृष्ण
शत्रुओं के भी
~~

फ़ेसबूक-ब्लॉग का शुक्रिया .....
~~
आज के ही दिन मेरे पापा के दादा जी की मृत्यु हुई थी …. वे जन्माष्टमी का व्रत करते थे …. रात में फलाहार करने के लिए ,ज्यूँ ही वे आँगन में आये और पीढ़ा (लकड़ी की छोटी चौकी) पर बैठने लगे कि उन्हें सांप काट लिया …. उनदिनों ना तो इलाज की सुविधा थी और मौसम का कहर अलग से ….  उनकी मृत्यु हो गई …. मरते-मरते वे बोले कि आज के बाद इस घर में ,सांप के काटने से किसी की मृत्यु नहीं होगी …. उनका आशीर्वाद कहिये या संजोग ,आज तक मेरे मइके के परिवार में किसी को सांप काटा नहीं है …. लेकिन कृष्ण की पूजा वर्जित हो गई  ….  जन्माष्टमी बंद हो गया ….
नींव बचपन में ही मजबूत होती है ….
शायद इसलिए मैं भक्त नहीं बन सकी और ना गुण गाना आता है ….
लेकिन जानती हूँ ,मन में मेरे कोई खोट नहीं ….  किसी के लिए भी नहीं ….
~~
एक बहेलिया था .... उसका काम था .... उसे आराम कहाँ कि वो हरी भजन करता और अपने किए काम का प्रायश्चित करता .... लेकिन उसे मृत्यु उपरांत स्वर्ग मिला .... क्यूँ कि वो जब एक बार एक पेड़ पर चढ़ कर जाल में पक्षियों के फँसने का इंतजार कर रहा था तो अनजाने में उस पेड़ कि पत्तियां तोड़-तोड़ कर नीचे गिरा रहा था और नीचे में एक शिवलिंग था जिस पर पत्तियां गिर रही थी और वो पेड़ बेल का था और उस दिन शिवरात्र था ....
~~
एक लड़की थी …. उसे दिनभर मेहनत मजदूरी करनी पड़ती थी …. उसे पूजा-पाठ के लिए समय कहाँ मिलता …. लेकिन जब रात में सोने जाती तो कहती ….  हे राम ……  थकी जो होती …… उसके स्वाभाविक शब्द थे …. लेकिन उसके मोक्ष के लिए काफी थे ……

~~
ऐसे हैं हमारे भगवान ……………………. केवल ॐ जानती हूँ और जपती हूँ  ....


Tuesday, 27 August 2013

चुनाव का सामूहिक वहिष्कार


चुनाव वहिष्कार का संकुचित अर्थ है
मतदान नहीं करना ....
मेरा आग्रह है ,मतदान होने नहीं देना ....
चुनाव प्रक्रिया में वे जनता भी शामिल होती है .....
जो मतदान करवाने के लिए पेटी ढोते हैं ....
जो मतदान करवाने के लिए एक जगह जमा होते हैं ....
जिनके अनुपस्थित होने पर
जो उन्हें गिरफ्तार करने जाते हैं ....
और सुरक्षा का भार भी ....
जिनके कंधे पर दुनाली भी होता है ,
 सजावट की चीज
बूथ लूटने वालो पर चलती नहीं  ....
गिरफ्तार हुई जनता पर
जो सज़ा सुनाते हैं ....
जो उस सज़ा को अमल में लाते हैं ....
जो सारे वहिष्कार करें तब तो होगा ना
चुनाव का सामूहिक वहिष्कार ….
तब ना पड़ेगा असर चुनाव - आयोग पर
गेंद अभी जनता के पाले में हैं ....
अभी गेंद जनता के पाले में है .... ??
मनवाइये चुनाव आयोग को ....
 बनवाइये एक पार्टी हो केंद्र और राज्य की
खिचा-तान बचे .... राग-तान अलग-अलग ना हो ....
नहीं तो अगला राज किसी बहनोई के साले की ही होगी ....
फिर हम कागज़ काला करने के स्थिति में भी नहीं होगे ....
अभी Central Bureau Of Investigation तोता है
कानून किसी नेता के दामन में फंसी नगरवधू ....
मैं एक ऐसे नेता को निजी तौर पर जानती हूँ ....
जिनकी जिंदगी की शुरुआत किसी के
 गैरेज के किराएदार के रूप में हुई ....
आज वे करोड़पति हैं और कइयों के भ्रष्टपति भी .....
वे ,वो भी किसी के मतदान के वजह से ही .....
देश आज़ाद करवाने के लिए
असहयोग आंदोलन हुआ था ना  ....
शायद नींद तो खुले .....
चुनाव का सामूहिक वहिष्कार
इस बार ,एक बार तो होनी ही चाहिए ....


Monday, 26 August 2013

*हाइकू*




आठवें पुत्र
ज आठवें मुहूर्त (आठवें अवतार)
आठ पत्नियां

(कृष्ण ने आठ महिलाओं से विवाह किया- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा )



वृषाही पद्मा
थे राधिका रमण
वे क्यूँ ना मिले ?
??



पयोमुख थे
पूतना संहार की
वृष्णि वरद

पयोमुख = दुध-मुंहा बच्चा
वृष्णि = यदुवंशी .... वरद = वर देने वाला



रास लीला की
औ लीलाधर बने
कालिंदी तीरे



तजे न लोभ
गोपीनाथ उपाधि
रुद्र को मिली ....




किया विहारी
रुक्मिणी हरण
विशोक किया



मो क्यूँ विसारे
वो कुब्जा उद्धारक
मीरा उबाल



भेज उद्धव
मिटाया ऊहापोह
पिट्टस मिटा

पिट्टस = दुख या शोक से छाती पीटना



प्रकाष्ठा पाया
गोपी उद्धव वार्ता
पिञ्जक हटा

पिञ्जक = आँख का कीचड़ , जिसके कारण साफ नहीं दिखलाई देता है ....



सखा चुकाया
बढ़ाई सखी साड़ी
पट्टी का मोल



माखन चोर
प्रिय कदंब डार औ
मुरली धुन

 

पारिजात ली
गोवर्धन उठा ली
हारे ही इन्द्र



नैया हो पार
जो जन जान जाये
गीता का सार



दीनदयाल
कृपा करो दयालु
कृपानिधान

~~

Sunday, 25 August 2013

ये सब समझते हैं




अगर सब सच में परेशान हैं
बदलाव लाना चाहते हैं 
तो 
सामूहिक वहिष्कार करें ना
हम इस बार के चुनाव का 

केवल कागज काला करने से कुछ नहीं होगा 
ये सब समझते हैं ....

चुनाव में आपके मतदान का कोई महत्व नहीं 
जिसकी लाठी उसकी भैंस ही होती 
वही गूंगा-बहरा कठपुतली मिलेगा 
जिसकी डोर एक विदेशी के हाथ में ही होगा ......
ये सब समझते हैं ....

बोलना -लिखना आसान होता है .............
शहीद होना .... कुर्बानी देना ............ ??
कौन बोले 
आ बैल मुझे मार .....
ये सब समझते हैं .....

अगर चुनाव कराना ही है
तो पहले सही आदमी तो चुन लें
न वो पहले से नेता हो और न नेता पुत्र हो
ये सब समझते हैं ....

ऐसा नवयुवक हो जिसे सब
(सब का मतलब सब) पसंद करते हों
चुनाव आयोग ऐसे आदमी को ही चुनाव लड़ने की अनुमति दे
ये सब समझते हैं ....

अभी जो खड़े होते हैं
सांपनाथ हैं या नागनाथ हैं
हम जिसे चुनते हैं या जिसे नहीं चुनते हैं
सरकार बनाने के लिए एक जुट हो ही जाते हैं
ये सब समझते हैं ....

ऐसा नियम हो कि चुनाव परिणाम आने के बाद वे एक नहीं होंगे ....
विवश करें ना चुनाव आयोग को वो कुछ कड़े नियम बनाये ....
क्या आप सही समझते हैं ??

~~

बोझ/कल्पना/मृगतृष्णा?

26-07-2026 2+6+0+7+2+0+2+6=25 2+5=7 प्रदर्शनी का आख़िरी दिन, आज सभागार के बीच में चित्रकार ने एक बड़ा-सा दर्पण रख दिया था- भीड़ उसके सामने ज...