Monday, 30 December 2019

हाइकु

01.
साल का अंत-
वो छटपटा रहें
निशीथ काल।
02.
शीत सन्नाटा/शीत की शांति–
खिड़की के शोर से
कांप गई मैं।

 Monterey, 17-mile drive, Carmel

सेवेंटीन माइल्स यानी
लगभग सत्ताईस किलोमीटर में फैला समुंद्री तट(बीच)
चमचमाती रेत पे चांदी का वर्क
सिंधु में बिखर गया चांदी समेटे जल
सोनार ने निशा का गहना साफ किया
निशा पहन रही वर्षों से चांदी की हंसिया हार
पहरा था एक सितारे की बिसात
कल ही तो जिक्र की रात थी दूज की बात
खुद के लिए जिद किसी ने नहीं ठानी
चौराहे पर पहले आई गाड़ी को
पहले निकलने का मौका देते ज्ञानी
ग्लोबल जगत के सारभूत
विशेषताओं से परिचित अनुसंधानी

उन ठहाकों का शोर कम हो चला,
शातिर बन बेवकूफ बनाने की
कोशिश कामयाबी पर जो गूंजी थी।
रामायण गीता महाभारत
इतिहास भूगोल की गवाही से
नहीं चेतता अहमी मौंजी



5 comments:

  1. सुंदर

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 31 दिसम्ब 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सस्नेहशीष व असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार आपका छोटी बहना

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  3. सुन्दर चित्रों के साथ सुन्दर हाइकू और समुद्र के खूबसूरत नजारों के साथ अनुसंधानी रचना का क्या कहना ....खूब भालो

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  4. यह कविता दृश्य और सोच दोनों को साथ लेकर चलती है। चमचमाती रेत, चांदी सा जल और निशा का गहना आँखों के सामने साफ उभर आता है। आप प्रकृति की खूबसूरती से सीधे मानवीय व्यवहार पर आ जाते हैं, और यही मोड़ असर छोड़ता है।

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