Thursday, 2 January 2020

"आग का छल्ला"(रिंग ऑफ फायर/ज्वालामुखी)

     नागरिकता संशोधन अधिनियम के पक्ष/विपक्ष पर युवतियों-महिलाओं में चल रहे गर्मागर्म विचार-विमर्श के साथ चल रही किट्टी पार्टी में पूरी तन्मयता से पप्पी सबके थाली को पवित्रता प्रदान करने में भी लगा हुआ था।
    लपलपाती जीभ और एक व्यंजन का स्वाद ग्रहण कर वह दूसरी सजी थाली की ओर बढ़ जाता। इस प्रकार वह कई चक्करों में प्राय सभी थालियों में सजे व्यंजनों का स्वाद ले चुका था...। किन्तु इससे वहाँ उपस्थित किसी सदस्य को कोई अन्तर नहीं पड़ रहा था।
   मेजबान महोदया जिनके यहाँ यह पार्टी चल रही थी ने अपनी थाली में भी पप्पी द्वारा चखे व्यंजनों को नहीं बदला, अपितु प्रफुल्लित होते हुए पप्पी की प्रशंसा करते हुए सारी उपस्थिति को पप्पी की पॉटी के बारे में सगर्व बताने लगी कि एक दिन वह कुछ विलम्ब से घर पहुँची तो पप्पी की समझदारी देखकर अचम्भित रह गई थी बताने लगी कि,–"मेरे प्यारे पप्पी ने सोफे, किचन, बेडरूम को बचा दिया.. मुझे साफ करने में अधिक परेशानी न हो, इसलिए वह वाशिंग मशीन के कोने में जाकर फारिग हुआ..।"
  "आपके माता-पिता कब आने वाले हैं..?" श्रीमती सान्याल ने पूछा जो अपनी थाली में अपनी उंगलियों को दोबारा जुम्बिश नहीं दे रही थीं.. हदप्रद हुई जब मेजबान पप्पी के पॉटी के बारे में विस्तार से बता रही थी।
"जब इस पिल्ले को घर के बाहर रखने लगेंगी...।" मेजबान की युवा बेटी ने हँसते हुए कहा ।
"जरा आपलोग ही बताइए कि इसे कैसे बाहर रखूँ.. इसी की वजह से तो यहाँ अमेरिका में नागरिकता मिली है! इस देश के नियमानुसार जिस पिल्ले का जन्म यहाँ होता है उसको यहाँ की नागरिकता मिल जाती है।"￰
सारी उपस्थितियों में सन्नाटा बिखरा था और
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन ब-रंजिश
ब हाल-ए-हिज्रा बेचारा दिल है..
का शोर गूंज रहा था...।

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 02 जनवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. सस्नेहशीष व असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार आपका छोटी बहना

      Delete
  2. अप्रतीम संकलन।खूबशूरत।आदरणीय दीदीजी आपको सप्रेम नमस्कार।

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

चालाकी कि धूर्तता

लघुकथा लेखक द्वारा आयोजित 'हेलो फेसबुक लघुकथा' सम्मेलन का महत्त्वपूर्ण विषय 'काल दोष : कब तक?' था। आमंत्रित मुख्य अतिथि महोद...