Tuesday, 21 April 2020

हाइकु को विस्तार से जानें


रविवार- 16/02/2020
Ritu Kushwah :- अवकाश में कक्षा - विषय : कथन का भेद
जब भी हम हाइकु लिखते हैं सबसे पहला प्रश्न होता है कथन और दिखलाने में भेद करना
बिम्ब वास्तव में कल्पना रहित एक ऐसा दृश्य है। जिसे हम वर्ण क्रम में पूर्ण वाक्य में लिखते हैं।
Neh Sunita :- मुख्य समस्या बिम्बों को कथन से पृथक कर इस तरह रखना की वाह क्षण प्रस्तुत हो
Ritu Kushwa :- और कथन हम उन वाक्यों को कहते हैं, जिसमें हमने अपनी कल्पना या अनुभति समाहित की हो उदाहरण के लिए 'माता दुखी है' कथन है और 'माता के आंखों में आँसू' बिम्ब है। हमें यह समझना होगा कि बिम्ब भी हम कह कर ही बताते और कथन भी तो फिर बिम्ब दिखाना और कथन कहना कैसे हुआ... इसे अपनी एक रचना से समझाने का प्रयास करती हूँ।
घना कोहरा-
कुड़ेदान मे सोए
माँ संग बिल्ली। ऋतु कुशवाह 'लेखनी'
यह एक दृश्य है। जिसमें मैंने घने कोहरे में बिल्ली और उसका बच्चा कूड़ेदान में ठंड के कारण दुबक कर सो रहे है। अब इस दृश्य को मैंने दो बिम्बो में बाँट दिया। एक प्राकृतिक बिम्ब "घना कोहरा।" यह पूर्ण वाक्य है व्याकरण की दृष्टि से और वर्ण गणना में भी पूर्ण तथा कल्पना रहित है अतः यह वाक्य एक बिम्ब हुआ।
Neh Sunita :- क्या पंक्ति दो और पंक्ति तीन भी अपने आप में अलग-अलग पूर्ण वाक्य होने चाहिए?
Ritu Kushwah :- ऐसा आवश्यक नहीं  है। परंतु यदि हो तो सुंदरता आ जाती है। पर न हो तो कोई दोष नहीं है।
दूसरा बिम्ब :-
कूड़ेदान में सोये
माँ संग बिल्ली।
यदि इसकी जगह मैंने यहाँ यह लिखा होता कि ठंड में सोये या फिर दुबक कर सोये तो यह कथन होता। क्यों होता कथन?
क्योंकि इसमे मैने उस दृश्य को देखते समय में जो कल्पना आई थी वो भी समाहित कर दी बिल्ली को ठंड लग रही है ये मेरा अनुभव है और बिल्ली दुबक कर सोई है ये मेरी कल्पना तो कल्पना या अनुभव के साथ वाक्य कथन हो जाता है। वही यदि दृश्य जैसा दिखा वैसा ही कह दिया तो दिखाना हुआ। वही हम पहले वाले उदाहरण से देखते है। 'माता दुखी है' यह वाक्य कथन क्यों है? इसे इस प्रकार समझते हैं कि माता दुखी है यह कैसे पता चला? क्या देख कर पता चला ? या माता के आँखों में आँसू देख कर पता चला। तो वास्तव में दृश्य क्या था ? माता के आँखों में आँसू दृश्य था।तो फिर दुख क्या था वो मेरा उनके आंखों में आँसू देख कर अनुभव था। अतः माता दुखी है कथन हुआ और माता के आंखों में आँसू बिम्ब हुआ। करवा चौथ सेनेर्यु :-
पति व सौत
छलनी की ओट में-
तलाकशुदा। ऋतु कुशवाहा
 Kailash Kalla :- Ritu Kushwah जी ये शेनेर्यू क्यों ? करवा चौथ दर्शाता तो है?
Ritu Kushwah :- Kailash Kalla जी क्योंकि इसमें कोई भी प्राकृतिक बिम्ब नहीं है।
मनोरमा जैन 'पाखी' :- तलाकशुदा है तो व्रत क्यों ?
Neh Sunita :- Ritu Kushwah जी आदरणीय Kailash Kalla जी की बात उचित प्रतीत होती है मेरा ध्यान नही गया था उस दिन इस बिंदू पर ये हाइकु ही है क्योंकि इसमें एक विशेष माह के विशेष दिन का उल्लेख है शेष आदरणीय Tushar सर जी मार्गदर्शन करेंगे।
Tushar Gandhi :- नेह आप ठीक कह रही हैं। इसमें ऋतू बोधक तो है पर 12 वाले हिस्से में एक किस्म का कटाक्ष है यह दर्शाता है जो सेनर्यू का निर्देश करता है... यह रचना मिश्रित है...
Kailash Kalla :- मनोरमा जैन 'पाखी' जी,शायद, सौत शब्द का प्रयोग ये दर्शाता है, पति ने पत्नी की इच्छा के विरुद्ध तलाक लिया है, पत्नी ने पति को नही छोड़ा।
मनोरमा जैन 'पाखी' :- Kailash Kalla जी फिर तो आह क्षण है ।करवाचौथ प्राकृतिक है । फिर यह हाइकु ही तो हुआ ।शेनर्यू नहीं मेरे विचार से।

दिनांक- 08/03/2020 अवकाश में कक्षा Ritu Kushwah :- विषय : दोहराव

दोहराव शब्दों या अनुभूति का सबसे पहले ये समझे कि हाइकु में दोहराव दो प्रकार से होता है। एक शब्दों का और दूसरा अनुभव का... और शब्दों का दोहराव भी दो प्रकार से होता है।

पहला पर्यायवाची शब्दों का दोहराव व दूसरा संज्ञा एवं जातिवाचक संज्ञा का दोहराव

सबसे पहले शब्दों के दोहराव को समझते हैं। पर्यायवाची शब्द या समान शब्द तो हम सब देख कर ही समझ सकते हैं। उसे बताने की अनिवार्यता नहीं लग रही है मुझे उदाहरण के लिए आकाश अम्बर मेघ। अब आप कहेंगे कि आकाश और मेघ में अंतर होता है । मेघ बरसने वाले बादल होते हैं और आकाश सदैव स्थिर होता है। परंतु दोनो ही एक दूसरे के पूरक हैं और जब मेघ होते हैं तो आकाश नहीं दिखता उसके स्थान पर केवल मेघ दिखते हैं तात्पर्य एक ही स्थान पे दोनों होते और दोनों में से कोई एक ही एक समय पर दिख सकता है अतः एक रचना में दोनो का होना दोहराव है। पर्यायवाची शब्दों से भी हमें बचना है पुष्प फूल मिष्ठान मीठा इत्यादि...

अब बात करते हैं दूसरे प्रकार की जिसमें संज्ञा एवं जातिवाचक संज्ञा के मध्य दोहराव होता है, हम रचना में कमल/गुलाब चम्पा चमेली आदि किसी पुष्प का नाम लिखे और साथ में उसी रचना में फूल या पुष्प भी लिखे तो यह दोहराव है क्योंकि जिसका नाम लिखा है वो भी फूल है ऐसे ही गंगा नर्मदा यमुना आदि किसी माता (नदी) का नाम लिखे और साथ ही सरिता नदी जल भी लिखे तो यह भी दोहराव है। तात्पर्य यह है कि यदि हमने किसी का नाम लिखा है तो उसी का जातिवाचक नाम न लिखे। यह तो बहुत सरल है। कठिनता आती है अनुभूति के दोहराव पर...  आपके किन्हीं दो शब्दों से यदि पाठक या श्रोता को समान अनुभूति हो तो यह अनुभूति का दोहराव हुआ.. इसे उदाहरण से समझते हैं। मैं कई रचनाओं में ये पंक्ति पढ़ी हूँ... 'कोयल की कूक' ।
कोयल के अलावा कोई नही कुकता। कूक भी कोयल का ही अनुभव करवा रही है और कोयल तो स्वयं का अनुभव करवा ही रही है।... और देखें 'मछली जल में तैरे'।
मछली क्या आकाश में भी तैरती है? नहीं, तो फिर जल लिखने की अनिवार्यता नही है। बस, मछली तैरे लिखने से पाठक को वही अनुभव होगा जो आपके जल लिखने से होगा तो यह दोहराव हुए। 'वायुयान आकाश में उड़ रहा है' । क्या वो जमीन पर भी उड़ता है? नहीं, जमीन पर चलता है एवं आकाश में उड़ता है। तो ऐसे में अगर में सिर्फ वायुयान उड़ रहा है लिखूंगी तो भी पाठक वही देखेंगे।

2 comments:

  1. अरे वाह दी सराहनीय संकलन।
    जिन्हें इस विधा में रुचि है उनके लिए बहुत उपयोगी है।

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    Replies
    1. सस्नेहाशीष संग शुक्रिया बहना

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