Friday, 12 June 2020

मदांधता


abc: बता दीजिये ना🙏🏻 ये तो जो मुझे कागज़ पर लिखा मिला मैंने उसे टाइप कर दिया। हाँ कुछ जगह मेरे कारण स्पेलिंग मिस्टेक जरूर हुआ है..
xyz: शुरू में ही विधाओं को विद्याओं किया हुआ है... पूरा शाम तक बताते हैं..
abc : इंतज़ार करेंगे🙏🏻: ये तो मेरी गलती है😂
 xyz : गलती कम हड़बड़ी ज्यादा है..
abc : 108 वर्ड प्रति मिनट😱😱, स्पीड बढ़ते जा रहा है और साथ में अशुद्धियाँ😂
xyz : अशुद्धियों को प्रमाण पत्र ज्यादा मिलता है 😜🙊
abc : सर्टिफिकेट हमको कोई नहीं देता है😉😔😱😂, हम अपना दायरा बढ़ने ही नहीं दिए हैं। क्योंकि मुझसे रोज़ लिखना संभव ही नहीं है। रोज़ लिखेंगे तो रचना का स्तर इतना खराब हो जाता है कि क्या बताएं... और अंड-बंड साहित्यक समूह जो ऑनलाइन चलती है उन्हें तो सिर्फ रचना से मतलब होता है। क्वालिटी से नहीं
xyz: रचना के स्तर से आज किसे मतलब है.. ना संस्था को और ना लेखक को ।श्रोता-पाठक अपना सर धुनें उससे क्या फर्क पड़ रहा है...?
abc : इसलिए भर-भर के रचना लिखें जा रहे हैं और एकदम फ्री में सर्टिफिकेट बंटा जा रहा है, ओह्ह ! और pqr जी😂.. उनकी रचना में मुझे कोई ओर-छोर ही नहीं समझ में आता रहता है😂
xyz : सब एक से एक महारथी हैं.. किसी की छोटी रचना नहीं होती... लम्बी करने के चक्कर में , 'ओर व छोर' से सेतु गायब हो जाता...!
abc : शुरुआत करती हैं ब्रह्मांड से.. बीच में कोरोना-फरोना... अंत अपने घर-आँगन के बगीचे पर..
मतलब की पढ़ने वाला कपार फोड़ ले😂😂
xyz : jkl से पूछे कि किस विधा में लेखन है तो उनका जबाब आया कि विधा तो पाठक तय करेगा🤦🏻‍♀️उसके बाद से मैं शॉक्ड हूँ...,🙊
abc: जवाब तो उचित था उनका😂😂 आजकल पाठक सब इतना होशियार हो चुका है कि वह तय करता है कि लेखक क्या लिखता है😂😂😂 : हम लेखकों का क्या बस कुछ भी कचरा लिख दो😂 पाठक तो हैं ही तय करने के लिए😂😂
xyz : अपनी गप्प ले जाएंगे ब्लॉग पर...
abc: कांड हो जाएगा😂😂 हम लोग तो कर्म करने निकले थे, वहाँ कांड हो जाएगा😂😂
xyz: शेर डरता नहीं.. वैसे नाम बदला रहेगा
abc: वह तो मुझे अंदाज़ा था🙂 : ये pqr जी और fgh जी मुझसे समीक्षा की माँग की थी😂 उनके अनुसार उनके कविताओं पर😂😂
xyz : पूछ लो ptm झेल लेंगी न : ऐसा ना हो कि दिल का दौरा ना पड़ जाए
abc : Ptm - parents teacher meeting ?🤔हम बोल दिए एकदम मस्त लिख रही हैं आपलोग😂
xyz : 🤦🏻‍♀️ पोस्टमार्टम.. ओह्ह!: यह चाणक्य नीति नहीं है
abc : 😂 ये मजेदार था.. : मुझे पता है 🙂 : लेकिन उन्हें समझाना ? उन्हें अपना तौहीन लगता है : और वैसे भी मैं क्या बताऊँ? उनकी रचनाओं पर! जिन्हें वह सब कविताएं कहती हैं😂हर पंक्ति दूसरे पंक्ति से भिन्न....
xyz : मुझे अनुभव है ! एक किस्सा सुनो ... "एक बूँद को घमंड हो गया कि समुन्द्र का उछाल उसकी ही वजह से है... एक बार ऊँची लहर के कारण , वो बूँद किसी जूते में जाकर अटक गयी...,"

9 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१३-0६-२०२०) को 'पत्थरों का स्रोत'(चर्चा अंक-३७३१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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    1. हार्दिक आभार आपका.. सदा खुश रहें

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  2. एक बूँद को घमंड हो गया कि समुन्द्र का उछाल उसकी ही वजह से है... एक बार ऊँची लहर के कारण , वो बूँद किसी जूते में जाकर अटक गयी...,"
    मस्त..जबर्दस्त.. सच में सच है।
    सादर प्रणाम दी।

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    1. सस्नेहाशीष संग शुभकामनाएं छूटकी..

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 12 जून जून 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सस्नेहाशीष संग शुभकामनाएं छोटी बहना

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  4. सारी बूँदें जूतों में अटकी पड़ी हैं और फिर भी बता रही हैं वो समुन्दर से बड़ी हैं प्रवृति पीछा कहाँ छोड़ती है :) बढ़िया।

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  5. बहुत खूब ,एक नया अंदाज लिए हुए ,बढ़िया पोस्ट

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  6. लाजवाब अभिव्यक्ति । अति सुन्दर ।

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