Wednesday, 4 November 2020

जैसे को तैसा

 



"क्या तुम्हारे सारे पैसे वापस आ गए जो तुमलोगों ने अति उत्साह में खर्च कर डाले थे?" अलका ने सौम्या से पूछा।

"लगभग!" सौम्या ने कहा।

"कैसे पैसे और कहाँ खर्च कर डाले थे?" रूपा ने पूछा।

वीडियो कॉल के जरिये तीनों सहेलियाँ अलका न्यूयॉर्क सौम्या कैलिफोर्निया व रूपा ह्यूस्टन से जुड़ अपने-अपने अनुभवों का आदान-प्रदान कर रही थीं।

"नीरसता और अवसाद को थोड़ा दूर करने के लिए मेरे पति ने एक योजना बनायी। पूरे अपार्टमेंट वालों से व्हाट्सएप्प ग्रुप के जरिये विमर्श किया और एक पार्टी की तैयारी की, 31 अक्टूबर 2020 को हैलोवीन पार्टी। बच्चों के लिए गेम तथा बच्चों, युवाओं को पसन्द आने लायक भोजन की व्यवस्था की गयी। 

मेरी बिटिया का जन्मदिन 2 नवम्बर को पड़ता है तो हमने सोचा कि एक पंथ दो काज हो गए। सन्ध्या में सभी एकत्रित हुए बच्चें गेम में जुट गए। पुरुष-महिलाओं को बहुत महीनों के बाद एकजुट होने का मौका मिला.. ,सभी गप्प में व्यस्त हो गए। किसी ने ना तो बच्चों का ख्याल रखा और ना तो भोजन लगाने में मेरी किसी तरह की मदद किया। हद तो तब हो गयी जब किसी ने भी किसी तरह से शुक्रिया-धन्यवाद कहने की आवश्यकता महसूस नहीं की। 

मैं भी दूसरे दिन व्हाट्सएप्प ग्रुप में सन्देश दे डाला कि अमुक परिवार को इतनी राशि इस अकाउंट में डाल देनी है।" सौम्या ने कहा।

"मेरे अपार्टमेंट में किसी को किसी तरह की परेशानी हो संयुक्त परिवार की तरह सभी एक दूसरे की सहायता के लिए धन-मन-जन से जुट जाते हैं। मेरे बच्चे के जन्म के समय अस्पताल से लेकर तीन महीनों तक ना तो भोजन की चिंता करनी पड़ी और ना बच्चे के देखरेख की। हमारे अपार्टमेंट में सदैव पुष्प प्रस्फुटित होते ही रहते हैं।" रूपा ने कहा।

"इतना देखभाल तो सास-माँ भी ना करें...," अलका-सौम्या ने एक स्वर में कहा।

"सत्य है हम अपने अनुभव पर अपने विचारों का विस्तार करते हैं।" रूपा ने कहा।

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 5.11.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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    1. असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार आपका

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आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
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अभिविन्यास

 "अद्धभुत, अप्रतिम रचना। नपे तुले शब्दों में सामयिक लाजवाब रचना। दशकों पहले लिखी यह आज भी प्रासंगिक है। परिस्थितियाँ आज भी ऐसी ही हैं। ...