Tuesday, 19 October 2021

राजनीत

 "वाह। बहुत खूब। इतना विशाल आयोजन..! आयोजक संयोजक को बधाई के संग साधुवाद। सफल कार्यक्रम रहा। मंच संचालन का तो क्या कहने..,"

"हार्दिक धन्यवाद। सच कह रहे हैं। मुख्य-अतिथियों का दो-तीन घण्टे विलम्ब से पहुँचना.., प्रशंसा के पात्र थे संयोजक महोदय जो थोड़ी-थोड़ी देर पर मंच से समय से पहुँचे को अवगत कराते रह रहे थे..,"

"उतना त स्वाभाविक है। इतना त मानकर चलना..,"

"मंच संचालक की कुशलता को दाद देनी चाहिए। कितना अध्ययन किया होगा..। नेपाली, दिनकर, इन्दौरी साहब, कबीर, मीर की चार-चार पँक्तियों को सहेजना और उनका सफलता से प्रयोग करते हुए। लगभग सात-आठ घण्टे में सात-आठ प्रतिभागियों को मंच पर मौका देना। बहुत बड़ी बात है। पीड़ या पीर..,"

"अगले मतदान में मनचाहा पार्टी से टिकट मिल जाने का पक्का इंतजाम हो गया है।"

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–अपनों में अपने संग केवल अपनी आत्मा रहती है...!

1 comment:

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