Sunday, 12 October 2014
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बोझ/कल्पना/मृगतृष्णा?
26-07-2026 2+6+0+7+2+0+2+6=25 2+5=7 प्रदर्शनी का आख़िरी दिन, आज सभागार के बीच में चित्रकार ने एक बड़ा-सा दर्पण रख दिया था- भीड़ उसके सामने ज...
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(1) पीली चुनर ओढ़े हठी धरणी मधुऋतु में ************* (2) षट रागिनी कुहू लगे मन पे कुसुमागम ************* (3) किंशुक छाया वशीभूत अचल...
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Interesting and Amazing World thank U .... मुझसे बेहतर मुझे , कौन जान सका है …। मेरे बारे कौन , क्या कहता है क्या फर्...


बहुत बढ़िया !
ReplyDeleteसाजन नखलिस्तान
बहुत बढिया आपने बहुत खुब लिख हैँ। आज मैँ भी अपने मन की आवाज शब्दो मेँ बाँधने का प्रयास किया प्लिज यहाँ आकर अपनी राय देकर मेरा होसला बढाये
ReplyDeleteबहुत सुंदर हायकू.
ReplyDeleteमुझे बहुत अच्छा लगा
ReplyDeleteआपका आँगन गूँजेगा पक्षियो की चहचाहाट से
बहुत सुन्दर दी ...सादर नमस्ते
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुति। कम शब्दों में गहरे अर्थों को संजोये।
ReplyDeleteगहरे अर्थ लिए छोटे छोटे शब्द ... लाजवाब हाइकू रोशनी लिए ...
ReplyDeletegagar me sagar ......
ReplyDeleteदीपावली का अर्थ लिए हुए सुन्दर हाइकू ....
ReplyDeleteबहुत सुंदर
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