Saturday, 14 March 2020

वक्त बदलता जरूर है


"हाथ ठीक से धो लो माया..., जब खाने की चीज उठाओ..," लैपटॉप-मोबाइल खाने के मेज पर रखकर work at home करती माया जब नाश्ते के लिए फल उठा रही तो मैंने उसे टोका.. केला खाकर उसी हाथ से स्प्रिंग रोल का डिब्बा खोलने लगी तो फिर टोक दिया।

"माँ! आप साफ-सफाई कैसे करें, स्वच्छता कितना जरूरी है ? जो आप वर्षों से करती रहीं.. सबको कहती रहीं। आज सभी मान रहे हैं। इसका वीडियो बनाकर डालिये न... वायरल होगा.. । सालों से सब आपको साइको कहते थे...। आज पूरा विश्व साइको है क्या...!"

महबूब कहते थे,- "माँ सबको कितना हड़का के रखती है.. जब देखो सबपर चिल्लाते रहते रहती है.. सब डरे-सहमे रहते हैं..,"

आप कहती थीं कि –"तुम तो कभी नहीं डरते सबसे ज्यादा तो तुम्हें ही मेरा सामना करना होता है?"

फिर वो कहते थे, –"वो क्या है न शेरनी के बच्चों को शेरनी से डरते नहीं पाया जाता!" और
"हँसते-हँसते हम सब मज़ाक में बात हवा में उड़ा देते थे..!"
"कोई बात नहीं आओ तुम्हें एक बिहारी कहावत सुनाती हूँ , कूड़े के दिन भी बहुरते हैं...!"
"सच कहा, कभी नाव पे गाड़ी कभी गाड़ी पे नाव।"


हँसते-हँसते कट जाए रस्ते
ज़िन्दगी यूँ ही चलती रहे
खुशी मिले या गम
बदलेंगे ना हम
दुनिया चाहे बदलती रहे



6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 14 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत अच्छे ����, स्वच्छता और जानकारी ही बचाव है

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  3. महबूब के बगल कोष्ठक में पुत्र लिख दीजिए

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  4. सुंदर संदेश आदरणीय दीदी। प्रणाम और शुभकामनायें🙏🙏🙏

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  5. साफ सफ़ाई जितनी हो उतनी कम है
    हाथ धोकर ही खाना पीना करें... आजकल जरूरी हो गया है ये।
    सार्थक।
    नई रचना- सर्वोपरि?

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