Saturday, 18 September 2021

दासता है

 हम 

मातृ, कन्या, बालिका, महिला, बेटी,

वृद्ध के संग हिन्दी दिवस भी मनाते हैं।

विलोपित को याद करते हैं या

सतत विलोपित में सहायक होने का त्योहार मनाते हैं

जिन शब्दों का हिन्दी तथाकथित क्लिष्ट नहीं है

उसका भी आंग्ल प्रयोग करते हैं और 

सामयिक मांग गर्व से कहते हैं।

अधिकांशतः

उपहास उड़ाने वालों को

दर्पण भेंट देना भूल जाते हैं।


हिन्दी के वासी हिन्दी की बधाई देते हैं

इक दिवस की नहीं प्यासी हिन्दी 

आंग्ल की है नहीं न्यासी हिन्दी 

हँसते, रोते हैं कभी हम उदास होते हैं

सांस हिन्दी है, सदा इसके पास होते हैं।


आंचलिक शब्द हमें रास नहीं आते हैं

हम इन्हें हिन्दी का दुश्मन तलक बताते हैं।

और अंग्रेजी हेतु सूरदास होते हैं

सांस हिन्दी है, सदा इसके पास होते हैं।


कौन कितना गलत नहीं हमें बहस करनी है।

राष्ट्रभाषा हेतु प्रवाहित समर करनी है।

निर्णीत अपने धर्म का पालन सहर्ष करते हैं,

सांस हिन्दी है, सदा इसके पास होते हैं।

9 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 19 सितम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सब हिन्दी प्रेमियों के हृदय को सत्य एवं सुन्दर वाणी दिया है । सबों को अधिक उदार होने की आवश्यकता है अब हिन्दी के लिए ।

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  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-9-21) को "खेतों में झुकी हैं डालियाँ" (चर्चा अंक-4192) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा


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  4. हिंदी उत्थान को नव ऊर्जा देती सुंदर सार्थक रचना ।आपको बहुत बधाई ।

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  5. कौन कितना गलत नहीं हमें बहस करनी है।
    राष्ट्रभाषा हेतु प्रवाहित समर करनी है।
    निर्णीत अपने धर्म का पालन सहर्ष करते हैं,
    सांस हिन्दी है, सदा इसके पास होते हैं।

    बिल्कुल सही कहा आपने आदरणीय मैम! उम्दा रचना!

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  6. राष्ट्रभाषा हेतु प्रवाहित समर करनी है।
    जी मेम अपनी मातृ और राष्ट्र भाषा के लिये जरूर समर करना है ।
    बेहतरीन रचना । बहुत बधाइयाँ ।

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