दो दो लड्डू दो दो लड्डू दो दो
खिली सरसों–
बवंडर में नाचे
पत्ते व पन्ने
°°
कुर्सी कुछ ऐसी है
जिससे चिपकते ही
राग बदल जाता है
पंच में परमेश्वर नहीं दिखता है
न्याय का क्रय-विक्रय होता है
अपने होने का उपहार पाता है
26-07-2026 2+6+0+7+2+0+2+6=25 2+5=7 प्रदर्शनी का आख़िरी दिन, आज सभागार के बीच में चित्रकार ने एक बड़ा-सा दर्पण रख दिया था- भीड़ उसके सामने ज...
सटीक
ReplyDeleteआपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24.02.22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4351 में दिया जाएगा| ब्लॉग पर आपकी टिप्पणी चर्चाकारों की हौसला अफजाई करेगी
ReplyDeleteसादर धन्यवाद
दिलबाग
हार्दिक आभार आपका
Deleteएकदम सही कहा आपने
ReplyDeleteकुर्सी से चिपकते ही राग बदल जाते हैं
बहुत खूब !
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