जेठ की तपी भू पर सावन की बौछारों सा लगभग पाँच साल के बाद परदेशी सपूत उनकी अस्वस्थ्यता के निदान हेतु आया। दीवाली का समय! लगे हाथ पूरे घर की सफाई करवा दिया तथा अनाज फल मिठाई आवश्यक समानों से भरा घर गुलजार हो उठा।घर गुलजार होने पर उन्हें याद आया मोटका मुन्ना के घर में रहने की बातें। उसके घर में वेलोग किराए में रहते थे। उसके घर के आगे एक कब्र था कब्र से सटे भुतहा घर जो बेहद सुंदर था तो पीछे मौलवी जी का घर जो साँप के काटे रोगी का इलाज़ करते थे। भुतहा घर के बगल में नशेड़ियों का घर था। भुतहा घर में एक दंपती थे जिनसे मिलने पत्नी के मायके वाले आए थे, माता-पिता, भाई। निदान में उन्हें चिकित्सकों के चक्कर से मुक्ति मिल गयी... पिता महोदय सिर्फ थेरेपी पर निर्भर हो गए तो माता सिर्फ सुबह के सैर पर।
लगभग सवा महीना संग रहकर परदेशी पूत की पुन: विदेश वापसी हो गयी।भुतहा घर में रहने वाली पत्नी का इलाज़ चल रहा था। प्रतिदिन एक सुई देने वाला चिकित्सक का सहायक आता था लेकिन उस दिन लगातार मूसलाधार बारिश होने के कारण आने से इंकार कर दिया। सुई पड़ना आवश्यक था तो पिता ने स्व देने का निर्णय किया। ज्यों सुई देकर सिरिंज निकालकर रखे बेटी की हालत बिगड़ने लगी। पिता भाई का घर बाहर भीतर बैचेनी में टहलते देखकर आस पास के लोग अपने -अपने घर के दरवाजे पर खड़े हो गए। कुछ देर में ही जोर-जोर से रोने की आवाज आने लगी।बरसात के कारण साँप के काटे के मरीज की भी मौत हो गई । उसे जगाए रखने में टहलाना भी नहीं हो पाया। मुस्लिम कैलेण्डर के मुताबिक शाबान माह की 14 तारीख को शब-ए-बरात का त्योहार मनाया जा रहा था ।
कब्र पर जली मोमबत्ती सजाई गई थी..नशेड़ी बरसात से बेअसर मोहल्ले वाले को गाली दे रहा था। वार्ड मेयर के चुनाव में हार का सामना सहन नहीं कर पा रहा था।परदेशी सपूत 23 नवंबर की रात लगभग सवा बारह बजे घर से निकला सुबह के 3:35 में हवाई जहाज से निकलना था जो कि 24 नवंबर के दोपहर शाम में दूसरे हवाई जहाज से सेन होज पहुँच जाता.. फ्रैंकफर्ट में दूसरे हवाई जहाज में चढ़ने के बाद तकनीकी खराबी के कारण 25 नवम्बर की शाम तक नहीं पहुँच सका है। चिन्ता में होते हुए भी नहीं कहा जा सकता है कि कौन ज्यादा चिन्ता में होंगे।
Thursday, 20 April 2023
रंगीन पत्ते : एकालाप शैली
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२६ अगस्त २०२६
आज ना तो संयुक्त परिवार है और ना सासू जी के नुकीले दाँत बचे हैं- बेटियाँ ससुराल में नहीं रह रही -बेटों का रूप बदला है… समाज में अभी अनेक ऐसे...
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Interesting and Amazing World thank U .... मुझसे बेहतर मुझे , कौन जान सका है …। मेरे बारे कौन , क्या कहता है क्या फर्...
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(1) पीली चुनर ओढ़े हठी धरणी मधुऋतु में ************* (2) षट रागिनी कुहू लगे मन पे कुसुमागम ************* (3) किंशुक छाया वशीभूत अचल...

अच्छा है यहां अभी खबर मिली थी पुत्र लन्दन से आया खाट पडी माँ को देखकर मुक्ति खुद दे गया |
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