वैसे बकवास को बकवास ही काटेगी :)
😀जी🙏
आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!
तपकर रिश्तों की अगन, सींचा सबका भाग माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग मेघ गर्जन— माँ की सिखलायी धुन में नाचे मृण शिल्प में बोसा जुड़ रहा...
वैसे बकवास को बकवास ही काटेगी :)
ReplyDelete😀जी🙏
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