अगर किसी विधा में मशीनगन चलाने की इच्छा हो ही जाए तो बकवास करने वाले को रोकना बकवास ही होगा क्या?
मद मर्दनMonday, 17 April 2023
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०१ मई : लघुकथाकार श्री मधुदीप जयन्ती
पंचर की मरम्मत “कारखाने की घड़ियों की टिक-टिक मेरे सिर में हथौड़ों की तरह बज रही थी। मेरे पेडू का दर्द किसी तेज़ धार वाले चाकू की तरह उसे भी...




वैसे बकवास को बकवास ही काटेगी :)
ReplyDelete😀जी🙏
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