युद्धान्तहीन—
पृष्ठों के युद्धपोत
बाड़ के पास
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ख़िंज़ाँ की शाम—ग्रहण में ही रहाआह या वाह
ख़िंज़ाँ की शाम—
ग्रहण में ही रहा
आह या वाह
तुम और मैं
ना/क्यों ‘हम' नहीं रहे—
ख़िज़ाँ की शाम
भिन्नार्चा स्थल
शरणार्थी शिविर—
युद्धान्तहीन
आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!
युद्धान्तहीन— पृष्ठों के युद्धपोत बाड़ के पास ## ख़िंज़ाँ की शाम— ग्रहण में ही रहा आह या वाह ## तुम और मैं ना/क्यों ‘हम' नहीं रहे— ख़िज...
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आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!