युद्धान्तहीन—
पृष्ठों के युद्धपोत
बाड़ के पास
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ख़िंज़ाँ की शाम—
ग्रहण में ही रहा
आह या वाह
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तुम और मैं
ना/क्यों ‘हम' नहीं रहे—
ख़िज़ाँ की शाम
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भिन्नार्चा स्थल
शरणार्थी शिविर—
युद्धान्तहीन
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स्मृति पट्टिका—
आँसू से भींगे पाँव
पत्ती कुचले
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छड़ी कोर से
इंद्रायुध छू लेना
झाग बौछारें—
शमी का फूल
पुनः ताल में तैरे—
पृथ्वी दिवस
वाह
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