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स्वाद की मर्यादा
शान्त, सजग और आत्मसम्मान से भरी मृदुला एक बड़ी विज्ञापन एजेंसी में क्रिएटिव हेड थी। नाम की तरह ही उसका स्वभाव भी बेहद मृदु था। —न उसकी आवाज...
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अन्तर्कथा “ख़ुद से ख़ुद को पुनः क़ैद कर लेना कैसा लग रहा है?” “माँ! क्या आप भी जले पर नमक छिड़कने आई हैं?” “तो और क्या करूँ? दोषी होते हुए भ...
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“हाइकु की तरह अनुभव के एक क्षण को वर्तमान काल में दर्शाया गया चित्र लघुकथा है।” यों तो किसी भी विधा को ठीक - ठीक परिभाषित करना ...

वाह क्या बात है दी शानदार सृजन।
ReplyDeleteअरे वाह ताई जी क्या बात कही है
ReplyDeleteहार्दिक आभार आपका
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 01 जनवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteबढ़िया
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