Thursday, 28 May 2020

नई भोर


प्रदर्शी का जन सैलाब उमड़ता देखकर और विक्री से उफनती तिजोरी से आयोजनकर्ता बेहद खुश थे। जब बेहद आनन्दित क्षण सम्भाला नहीं गया तो उन्होंने अपने मातहतों से कहा,-"इस साल तुम्हारा बोनस दोगुना होगा।"

उनकी बात सुनते ही मातहतों में खुसर-फुसर शुरू हो गई.. –"वैश्विक युद्ध और लॉकडाउन की परिस्थितियों में एक साथ मिलकर चित्रकार, कशीदाकार, करघा कर्मकार सभी ने हालातानुसार 'भावनात्मक समानुभूति' से कपड़ों पर काम किया और उन वस्त्रों को देखकर हमें कितनी डांट खानी पड़ी थी।"

"कोई बात नहीं इनाम भी तो हमें ही मिल रहा है।"



वन विहार–
पक्षी उकेरा वस्त्र
प्रदर्शनी में।


4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 28 मई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सस्नेहाशीष व शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार छोटी बहना..

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  2. हर तरफ उजाला हो इस भोर का।

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  3. बहुत ही बढ़िया ,इनाम सब कुछ भूला देती है ,शुभ प्रभात

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