Friday, 12 August 2016

समय



खुद की मान बढ़ाने के चक्कर में दूसरे के मान को ना छेड़ें
समय का बही-खाता ऐसा है कि सबका हिसाब रखता है ढेरे

शारदा जी के खिलाफ विभा को और विभा के खिलाफ शारदा जी को भड़काने का एक भी मौका नहीं गंवाते राजू अंजू .... शारदा जी पुत्र मोह में और देवर देवरानी को हितैषी समझ विभा यकीन करती रही ....नतीजा ये हुआ कि शारदा जी और विभा में पूरी जिन्दगी नहीं बनी ....विभा के पति अरुण को अपनी माँ शारदा जी पर पूरा विश्वास था ....शारदा जी जो कहतीं , अरुण आँख बंद कर विश्वास करते और अपनी पत्नी को कभी सफाई देने का भी मौका नहीं देते .... विभा पूरी जिन्दगी सभी रिश्तों को खोती ही रही .... राजू अंजू को खुद को काबिल समझने का तरीका अच्छा मिला था .... 30-32 साल का समय कैसे कटा विभा का इस कागज़ पर लिख पाना संभव नहीं ... लेकिन शारदा जी के मौत के बाद उनकी डायरी विभा को मिली .....
अब विभा करे भी तो क्या करे ................................... चिड़िया खेत चुग चुकी है

आप में से किसी की स्थति शायद सम्भल जाए

Wednesday, 10 August 2016

ड्योढ़ी कब लांघे ?



समाज में कई सवाल बिखरे पड़े हैं ..... सहना क्यूँ कब तक बहना ?

जब तक केवल वो बहु थी
कुछ नहीं रही उसकी औकात
न घर की ना घाट की !
जब बने सास तब होती खास
जमीर रहे गर उसकी जिंदा
बहु ले पाती चंद सांस !!

गृह त्याग तब क्यूँ नहीं की ….. जब कर्कशा सास हर आने जाने वाले रिश्तेदार को दहेज में कमी होने का रोना रोती और खुद महान होने का नाटक परोसती …..

गृह त्याग तब क्यूँ नहीं की …. जब बददिमाग मुंहफट ननद …. मझली भाभी के भाई को हरामी बोली …. मझली भाभी के हंगामा करने पर …. बड़ी भाभी के मुंह से निकल गया …. बबुनी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए था ….. बड़ी भाभी का बोलना गुनाह इतना बड़ा हुआ कि उसके भाई को बुला कर घर छोड़ देने का आदेश मिला …. {बड़ी भाभी तब तक गर्भवती हो चुकी थी …. पुत्र जन्म देने पर उसके विरोध में उसके बेटे को ही खड़ा करने की जी तोड़ कोशिश की सबने}….. कैसे और कहाँ जाती इस दोखज़ समाज में …… उसके बाद तो सिलसिला शुरू हो गया ….. हर छोटी बड़ी बात पर घर से निकल जाने का आदेश पास हो हाज़िर हो जाता ….. देश का राष्ट्रपति मुंह पे ऊँगली रखे रहता है …. घर में पेटीकोट सरकार हो और कापुरुष हो संग तो ……. घर का सबसे बेगैरत बेरोजगार (काश ! हमेशा रहता ) छोटा बेटा रातो रात बड़ी भाभी के मइके जाता और उस समय जो आ पाता उसे वो साथ लेकर पौ फटते चला आता ….. मइके वाले शायद इसलिए चले आते समाज में प्रतिष्ठा बनी रहे ….. मझला बेटा बहू को सूरत का घमंड था …..काश कुछ सीरत भी मिला होता ….जिसे लूट सकता उससे सटता ….. लूटे माल पे इतराते घूमते ….. बड़ी भाभी का शिकायत करना ….. उनका मनपसंद शगल था ….. जड़ खोदता रहा ……

गृह त्याग तब क्यूँ नहीं की …. जब पति छोटी उम्र की स्त्रियों को साली और बड़ी उम्र के स्त्रियों को भौजाई कहता और उसके सामने ही फ्लर्ट करने की कोशिश करता ….. बिना उसके गलती को जाने समझे पूछे उसे पिट डालता …. कान का कच्चा बेटा पाकर डायन सास लगाती बुझाती रही पूरी जिन्दगी …..

आज अपने पति की बेवफाई सिद्ध होने पर ….. बिना पल गंवाये सिंदूर चुड़ी बिंदी उतार उसी पति को सौंप …. पथ पर भटकते हुए सोच रही है ….. इन्ही बेटों की परवरिश कर अहंकार से कर्कशा शारदा देवी कहती थी ……दीया लेकर खोजने निकलो तो मेरे बेटों जैसे बच्चे दुसरे नहीं मिलेंगे
अच्छा है दुनिया में एक ही परिवार ऐसा है ……

पति या पत्नी का बहकना
उसके पीछे होता
उसे मिले
संस्कार का होना
सहना तभी तक गहना
जब तक मान न गंवाना
हर भाई बहना समझना


Tuesday, 9 August 2016

अनुभूति



सारे रिश्ते
स्वार्थी मतलबी
झूठे होते हैं
चाहे जन्म से मिले
चाहे जग में बने
अकेला जन्म
अकेला मृत्यु
सत्य यही
कल भी था
कल भी होगा

Sunita Pushpraj Pandey :- माना जन्म और मृत्यु अकेले पर जीवन मे अपनो का साथ
सबकुछ सहज बना देता है

विभा रानी श्रीवास्तव :- कौन अपना ? किसी अपने को कभी आंक कर देखना सखी

Sunita Pushpraj Pandey :- बाकी का नही पता पर पति मेरा अपना है मेरा कष्ट उनके चेहरे पर नजर आता है जबकि वो कहते हैं मै सिर्फ अपने कर्तव्य निभाता हूँ

विभा रानी श्रीवास्तव :- आप खुशकिस्मत हैं कि पत्नी का दर्द महसूस करने वाला आपको आपके पति मिले
जरा उनसे पूछ कर बताइयेगा कि क्या आपके चिता के संग सती/सता होंगे न वे / अगर आप पहले मुक्त हुई इस जीवन से तो .... या रह भी जायेंगे तो .... सन्यासी हो जायेंगे न ...?

Sunita Pushpraj Pandey :- हाँ प्रैक्टिकल तो है वो पर परिवार से प्यार करते हैं किसी के विषय में सोच तो सकते हैं पर अपना नही सकते मेरे साथ भी मेरे बाद भी

विभा रानी श्रीवास्तव :- चिता के संग जायेंगे सवाल का जबाब ढुंढियेगा सखी

Sushma Singh :- सहमत पर कूछ अच्छे अौर सच्चे भी होते है

विभा रानी श्रीवास्तव :- पति के साथ सती होती थी स्त्रियां उसे भी रूढ़ी मान बदल दिया गया
उसके आगे पीछे किसी रिश्तेदार को किसी रिश्तेदार के साथ मरते नहीं पाई हूँ  अब तक .....

माता भू शैय्या
लॉकर खंगालते
बेटा बहुयें।

अंकिता कुलश्रेष्ठ :- जीजी ये तो सही है.. हर कोई निज स्वार्थ से रिश्ते बनाता है
चाहे जैसा स्वार्थ हो.. जैसे आप के साथ रिश्ता ... मुझे ऊर्जा प्रेरणा और खुशी देता है..
हुआ न मेरा स्वार्थ

विभा रानी श्रीवास्तव ;- हमारा क्या रिश्ता है इसकी कोई परिभाषा ही नहीं गढ़ सकता है
लेकिन एक दूसरे के वियोग में हम प्राण नहीं त्याग सकते हैं
पैरों में कई बन्धन हो सकते हैं न लिटिल Sis

अंकिता कुलश्रेष्ठ :- पर आप मेरे लिए अनमोल हो ... प्राण तो जिसने दिइए उसका अधिकार

विभा रानी श्रीवास्तव :- बिलकुल सही बात लिटिल Sis ..... जो सहमत नहीं उनकी अनुभूति उनके विचार
जैसे किसी का लेखन उसकी अनुभूति की अभिव्यक्ति होती है वैसे ही उस लेखन से दूसरे की सहमति या असहमति उसके खुद की अनुभूति होती है ... मैं अपनी अनुभूति में अपने कानों को शामिल नहीं करती हूँ

प्रश्न :- किसी के अनुभूति का दायरा कितना होता है ?

उत्तर :- श्री उमेश मौर्य जी :- व्यक्ति की परिस्थिति, पर्यावरण, चिंतन, और उसके पूर्व (अच्छे व बुरे) अनुभव ही उसकी अनभूति का माध्यम बनते है |
एक ही बात अलग अलग परिस्थिति में अलग अनुभव की हो सकती है |
हम किस तरह के परिवेश, माहौल में रहते है जिससे हमारी मनः स्थित प्रभावित होती है |
और हमारे पूर्व अनुभव हमारे सामने आने वाले सभी विचारों का मूल्याकंन कर एक आधार बनाते है |


Sunday, 7 August 2016

बेचारी बनी हिंदी




मेघाच्छादित
धारे युवा युवती
जींस धुंधली ।

@जींस धुंधली = यानि faded जींस यानि ब्लू जींस पे सफेद धब्बे .... फैशन

सुझाव मिला

तिर्छी नज़र -
मेरा फीका ब्लू
जीन्स आकर्षे

हाइकु और वर्ण पिरामिड विधा में काव्य लेखन में वर्ण से कमाल होता है
कोई -कोई शब्द बहुत अच्छे लगते हैं
लेकिन
वर्णों के कारण जी मसोस कर रह जाना पड़ता है

वर्ण की सुविधा के लिए
बहुत लोग हिंदी के शब्दों में से वर्ण कम कर रहे हैं
तिरछी = तिर्छी
आकर्षित = आकर्षे
मध्यान = मध्या

परिवर्तन दुनिया का नियम है
चलो मान लेती हूँ
परिवर्तन हिंदी में ही क्यों जबकि वो समृद्ध है
English में ज्यादा जरूरी नहीं है न
Man सरक के go के पास आ जाता है तो
mango हो जाता है
अच्छी बात है मुझे भी नये नये शब्दों को जानने का शौक है
English word में से भी लेटर सरका सकते हैं न
Mango = Mgo लिखते हैं

आंटी से बुआ मौसी चाची मामी
अंकल से फूफा मौसा चाचा मामा
Law लगा दो तो सारे रिश्ते अपने रूप बदल लेते है
परिवर्तन वहाँ क्यों नहीं जरूरी समझ रहे हैं लोग

हिंदी में तो बिंदी का भी महत्व है
शंकर शकर को देख लें

सब समझौता माँ ही करती है न
हिंदी भी क्या करे संस्कृत की बेटी संस्कृत से संस्कार ली
सबके परिवर्तन को अपनाते जाओ
अस्तित्व ही मिटाते जाओ


Wednesday, 27 July 2016

हिंद - हिन्दुस्तानी - हिंदी






ऋचा सिंह मिसेज इंटेलिजेंस वर्ल्ड माइक पकड़े 
मेरे पति के मित्र की बेटी
पटना की बेटी
बिहार की बेटी
हिंद की बेटी
मेरी बेटी


 पटना में मिसेज एशिया यूनिवर्स का
फाइनल प्रोग्राम
सोमवार 24 जुलाई की रात हुआ
आजतक न्यूज़ चैनल पर प्रसारित मैं देखी 
कई देशों में दिखलाया गया होगा

आठ महीनों के प्रयास .... समझाने की कोशिश सफल हुई 
ऋचा के
कि ये प्रोग्राम बिहार में किया जाये
जद्दोजहद बिहार की स्थिति के कारण ऋचा को करने पड़े होंगे
भारत .... भारत में बिहार ... बिहार में आतंक
राजनीत का आतंक .... शिक्षा की कमी का आतंक
बिहारी शब्द बिहारियों के लिए गाली के रूप में प्रयोग होता है

जिसमें एक जज साऊथ अफ्रीका की मिसेज वर्ल्ड 2015 

एक प्रतिभागी कनाडा की थी

जिसे देखने मैं गई थी ... मोबाइल से रिकार्ड कर लाई तो अपने फेसबुक टाइम लाइन पे लगाई 
उस प्रोग्राम में इंग्लिश में बात सबने की थी
जिसे देखकर श्री 
मुकेश कुमार सिन्हा जी 
को देशभक्ति पर शक हुआ
उनका सवाल था कि जब विदेशी अपनी भाषा नहीं छोड़ते तो हम अपनी भाषा क्यों छोड़े
तो

विमर्श का विषय है कि जहां हिंदी नहीं चल सकती वहाँ क्या करना चाहिए ?

बिहार में मगही ,मैथली,भोजपुरी के संग हिंदी भी बोली जाती है ..... या यूँ कहें तो ज्यादातर हिंदी ही बोली जाती है .... बदलते माहौल का असर रहा तो कुछ सालों के बाद ज्यादातर अंग्रेजी ही बोली सुनी जाएगी .... जगह जगह मशरूम कुकुरमुत्ते की तरह अंग्रेजी स्कूलों का खुलने का असर और बच्चों पर दबाव कि वे अंग्रेजी में गिटपिट करें ....
हवाई यात्रा में मुस्कुराहट खो जाती हैं .... नोटों के नीचे कहीं दबी रहती है .... इंग्लिश की चीलपों ....
लेकिन  .... जब बिहार आने के लिए रेल की यात्रा करती हूँ तो बहुत आनंद आता है ..... मगही मैथली भोजपुरी हिंदी की गुनगुनाहट सुनाई देती है ..... अंग्रेजी बोलने वाले कम ट्रेन से सफर करते हैं न .... लेकिन जब बिहार से बाहर जाने वाली रेल यात्रा करती हूँ तो अक्सर एक दर्द साथ ...... सहयात्री को ज्यूँ पता चलता है बिहारी हूँ .... चेहरे का रंगत बदल जाता है .... मानों कोई क्रिमनल संग बैठी है .... जब देश में ये हालात है तो विदेशों में क्या हालात होते होंगे 
ऐसे हालात में विश्वास दिलाना कितना मुश्किल रहा होगा ..... 






Sunday, 26 June 2016

सुप्रभात मंच




** सुप्रभात मंच** बिहार शाखा का गठन
सम्मानित मित्रो,
अत्यंत हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि आदरणीया विभारानी श्रीवास्तव जी की अध्यक्षता में सुप्रभात मंच की साहित्यिक प्रतिच्छाया संस्था का गठन बिहार में कर दिया गया है । पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा अति शीघ्र कर दी जायेगी ।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि विभारानी श्रीवास्तव जी के नेतृत्व में यह संस्था हिन्दी साहित्य के प्रति निष्ठा से कर्तव्य का पालन करेगी ।
***** सुरेशपाल वर्मा जसाला



आदरणीय सुरेश पाल वर्मा जसाला जी द्वारा रजिस्टर्ड NGO सुप्रभात मंच

सुप्रभात मंच की सीहित्यिक प्रतिच्छाया संस्था दिल्ली के

बिहार शाखा का गठन
एवं
हाइकु गोष्ठी का आयोजन



Chief guest :- Dr. Satish Raj Pushkarna ji
President :- Vibha Rani Shrivastava
Vice President :- Smt Sangeeta Govil ji and Dr. Moni Tripathy ji
Chief Secretary :- Smt Poonam Anand ji
Secretary :- Dr. Pushpa Jamuar ji , Smt Kiran Singh ji , Smt Saumya Tiwari ji and Smt Binashree Hembrom ji
Treasurer :- Smt Ekta Kumari
Vice Treasurer :- Smt Maniben Diwedi and Alka JI
Advertisements :- Dr. Virendra Bhardwaj and Osama JI
Anchoring :- Smt Binashree Hembrom


आज बीज पड़ा
अंकुर , वृक्ष , फूल-फल समय पे निर्भर
समाज से लिया कर्जा
समाज को लौटाने की एक कोशिश

जमीं से जुड़ जायेंगे
तभी तो 
नभ तक उड़ पायेंगे






Sunday, 19 June 2016

पिता









कड़क छवि ...... अनुशासन .... कायदे कानून ..... केयरिंग ..... हम छोटे भाई बहन को ..... बड़े भैया में देखने को मिले ..... यानि पिता का जो रोल हम सुनते पढ़ते आये वो रोल तो बड़े भैया निभाये ..... इसलिए शायद पिता की कमी हमें आज भी महसूस नहीं होती ...... 

हमारे पिता (मेरे पिता + मेरे पति के पिता) बेहद सरल इंसा थे ..... दोनों घरों में मुझे माँ की भूमिका मुख्य दिखी ..... 


एक बार मेरे पति बोले कि .... * राहुल का बाहर जाना , मुझे शायद इसलिए नहीं खला कि ...... या तो मैं उसे सोया नजर आया या वो मुझे सोया नजर आया * ..... या कभी जगे में भेंट हो गई तो जितनी बात होती थी , उतनी बात आज भी फोन पर हो जाती है ...... कैसे हो ..... पढ़ाई कैसी चल रही है .... कोई जरूरत हो तो बताना ..... 


शायद इसलिए मेरे विचार ये बने कि बच्चों का भविष्य माँ के हाथों से सुघड़ होता है ..... पिता बस प्यार प्यार प्यार प्यार .................. बाँटते हैं ......




नीम बरगद पहाड़ नारियल ..... पिता को क्या परिभाषित किया जा सकता है .....




बेटी होना इक कर्ज

कुछ हिसाब एक जन्म में चुकता नहीं हो सकता है .... समय रहते या तो बुद्धि काम नहीं करती या हौसला में कमी हो जाती है .... समय रहते बुद्धि काम करती या समाज से लड़ने का हौसला होता तो ..... आज समाज से बहुत सी कुरितीयों का समूल नाश हो गया होता .... जिन कुरितीयों को सहना स्त्री भाग्य का लिखा मान लेती है .....
बेटी के बाप की गलती ना भी हो तो वो दामाद के पैर पकड़ माफ़ी मांगता है ताकि बेटी खुशहाल जिंदगी जिए ..... वैसी परिस्थितियों में बेटी तब क्या सोचती होगी ?
बेटी होना एक कर्ज है जो इक जन्म में अदा नहीं होता .......

Wednesday, 15 June 2016

वर्ण पिरामिड

वर्ण-पिरामिड सप्ताहाँक - 56 = ( सम्मान्य प्रमुख :: डी डी एम त्रिपाठी जी {भाई बड़े मणि } )
संचालन : आदरणीय श्री सुरेश पाल वर्मा जसाला जी
और समूह के सभी सदस्यगण
शीर्षक = बेहाल / परेशान / दुखी
चै
डूबा
डहार
लू कासार
टूटे ज्यूँ तट
तलमलाहट
काकतालीय दुःख {1}
हो
चूनी
कुपंथी
छीने चुन्नी
स्त्री परेशानी
समाज बेहाल
देख दुष्कर्मी चाल {2}
 

वर्ण-पिरामिड सप्ताहाँक - 48 = ( सम्मान्य प्रमुख :: कुसुम वियोगी जी )
शीर्षक = जयहिंद
>>>>
1
है
भीती
अधीती
जयहिंद
हिम ताज है
तोड़ न सका है
जयचंद संघाती
>>>>>
2
भू
गीती
चुनौती
अग्रवर्ती
नेक-नीयती
जुडाये अकृती
जयहिंद उदोती
>>>> हिन्द की जितनी जय की जाये ..... कम ही होगा
जय हिन्द

Thursday, 9 June 2016

पेड़ अधिक आबादी कम , इन बातों में कितना दम ?



परवचन में कुशल बहुत मिलेंगे ..... मुझे मेरे जिन्दगी में ..... बहुत ऐसे मिले भी .... जिनके हाथी जैसे खाने के और दिखाने के और .... अलग अलग दांत थे ..... बिना अपनी जिन्दगी में अपनाये केवल परोपदेश देना .... गाल बजाने जैसा होता है .... केवल थ्योरी की बातें असरदार नहीं होती है .....



1982 में मेरी शादी आर्थिक रूप से समृद्ध मध्यम परिवार में इंजीनियर से हुई ..... उस समय भारत में ...... हम दो हमारे दो .....  दो बच्चे होते अच्छे ..... छोटा परिवार सुखी परिवार .... का नारा गूंज रहा था .... क्यों कि उस समय तक ..... अधिकतर लोगों को चार से छः बच्चे होते थे ..... जनसंख्या बढ़ने से बेरोजगारी बढ़ रही थी ....  बेरोजगारी का असर मंहगाई पर भी पड़ती है ... बेरोजगारी हो और मंहगाई हो तो चारों तरफ त्राही त्राही मचना स्वाभाविक था .... तभी मेरे पति का निर्णय हुआ कि हम एक बच्चे को जन्म देंगे और उसकी ही परवरिश अच्छे से कर लें ..... यही बहुत होगा .... उस समय हमारे इस निर्णय से हमारे परिवार में एक तूफ़ान सा आ गया .... सभी का कहना था कि चार छः नहीं तो दो तीन तो होना ही चाहिए ..... समृद्ध होते हुए , भगवान का अपमान है .... कम बच्चा होना .... एकलौता बच्चा के सुख दुःख में कौन साथ देगा .... { संयुक्त परिवार टूटने के कगार पर था .... कारण था सुख-दुःख में साथ ना होना ही }

बाँझ का मुंह देखना चल भी जाता है ..... एकौंझ का मुँह देखना बहुत बड़ा अपसगुण है .......

बहुत बातों को सुनते .... नजरन्दाज करते हुए .... हम अपने निर्णय पर अडिग रहे और बाद में हमारे अनुकरण में हमारे देवर ननद का भी एक एक ही बच्चा रखने का निर्णय हुआ ...
मेरी ननद को एक बेटी ही रही मुझे एक और मेरे एक देवर को एक बेटा + एक बेटी तथा एक देवर को एक ही बेटा रहा ..... 
यानि जितने हम भाई बहन थे ..... उतने की ही संख्या बरकार रही ....


आज सभी बच्चे बड़े हो चुके हैं .... उनकी परवरिश में ... हमें ... कभी किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा .... चाहे उच्च शिक्षा दिलानी हो या चाहे उनकी पसंद की चीजे .... कहीं भी मन नहीं मारना पड़ा ..... जिस रफ़्तार से महंगाई बढ़ी .... हर क्षेत्र में कहीं ना कहीं समझौता करना पड़ सकता था ....

कम बच्चे होने से या यूँ कहें कम आबादी होने से भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सकती है .... सुरसा महंगाई को रोका जा सकता है .....


इतने सालों में मेरा अनुभव ये रहा कि पेड़ की कटाई काफ़ी तेज़ी से हुई है ..... कंक्रीट का शहर बसाने का जरिया हो या उद्योग लगाने का हो .... रोजगार बढ़ाने का साधन बना हो या फैशन के अनुसार फर्नीचर बनवाने का हो ..... उसका नतीजा ही है ... आज की गर्मी का बढ़ना ..... बारिश का नहीं होना या पहाड़ का खिसकना .... क्षति से परेशान मनु अपनी गलती मानने के लिए तैयार नहीं है ....  लेकिन मानना जरूरी है  ..... उस क्षति की पूर्ति के लिए ... हर जगह मैं और मेरे परिवार के सदस्य , हर आयोजन पर पेड़ लगा रहे हैं ...... कई शहरों में अनेकों प्रकार के पेड़ हम लगा चुके हैं ..... और .... सभी से अनुरोध करते हैं कि हर आयोजन पर पेड़ लगा कर , पर्यावरण से प्रदुषण को दूर करने में सहायक बनें .....


TAKE THE WORLD and PAINT IT GREEN!

मेरी रानी बेटी Maya Shenoy Shrivastava

पेड़ अधिक आबादी कम , इन बातों में बहुत है दम 

Tuesday, 7 June 2016

साधू - बिच्छू




Fb जैसा असली दुनिया में भी ब्लॉक का आप्शन होना चाहिये था
बार बार साधू की भूमिका नहीं निभानी पड़ती किसी बिच्छू के लिए

नजरों के सामने गुलाटी मारते देखना ज्यादा दंश देता होगा न

..... दिल ब्लॉक हो तो ........




सच को ..... चाशनी में लपेटना ..... हमेशा भूल जाती हूँ ..... जबकि जलेबी पसंद है ..... लेकिन मिर्ची ज्यादा लुभाती है .....





अदर्ज लेखा

“भैया ने मुझे तीन लाख रुपये कब दिए?” “यह किसने कहा?” “आपने छोटी भाभी से कहा है न?” “चुग़लीखोर से मैंने सिर्फ़ इतना कहा था कि गृहप्रवेश पर एक...