Monday, 17 February 2014

हाइगा


नदी हो या हो नारी
दोनों की बस यही कहानी

=======
1



===========

2

जीव सींचती 
स्थितप्रज्ञ स्त्री धारा 
अंक भींचती ।

===================

3


============
4



==========

4 comments:

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

सच का दर्द या मोक्ष में दरार?

26 जनवरी 3026 जहाँ तक नज़रें जाती हैं पृथ्वी पूरी तरह शुद्ध, नियंत्रित और निष्प्राण सन्तुलन का पर्याय बन चुकी है। दर्द, प्रतीक्षा, प्रेम—ये ...