Monday, 17 February 2014
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मातृ दिवस : आस की गूँज
तपकर रिश्तों की अगन, सींचा सबका भाग माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग मेघ गर्जन— माँ की सिखलायी धुन में नाचे मृण शिल्प में बोसा जुड़ रहा...
तपकर रिश्तों की अगन, सींचा सबका भाग माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग मेघ गर्जन— माँ की सिखलायी धुन में नाचे मृण शिल्प में बोसा जुड़ रहा...
बहुत ही बढ़िया आंटी
ReplyDeleteसादर
गहन फुहार..
ReplyDeleteवाह !
ReplyDeleteबहुत प्रभावी...
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