Wednesday, 14 October 2020

दलाल से भेंट

 कोरोना के भयावह काल से भयभीत.. दाँत-मसूड़ों में कई दिनों से हो रहे दर्द के कारण बेहद परेशानी होने के बाद भी पिता को चिकित्सक के पास ले जाने से सोहन कतरा रहा था। गन्दगी की कल्पना शायद हम बिहारियों में कुछ ज्यादा होती है..। सोहन को किसी मित्र ने बताया कि गुरुद्वारा में कैम्प लगाकर बेहद साफ-सफाई से जाँच-इलाज हो रहा है। 

शनिवार 3 अक्टूबर 2020 को जब सोहन अपने पिता के साथ गुरुद्वारा में लगे कैम्प में पहुँचा तो उसे पता चला कि केवल कोरोना का जाँच हो रहा है और बाकी बीमारियों के लिए निजी में ही जाकर दिखलाना होगा। पिता-पुत्र कोरोना के लिए जाँच करवा लेना उचित समझा। तीन दिन के बाद जाँच परिणाम मिलने की बात हुई। 

सोमवार 5 अक्टूबर 2020 सोहन के पास फोन आया कि "आपके पिता को कोरोना नहीं है। आपको अपने लिए राय लेने के लिए चिकित्सक से मिलना होगा । कल मंगलवार 6 अक्टूबर 2020 को चिकित्सक से मिलने का समय निर्धारित कर दिया जाए?"

"कार्यदिवस में अचानक समय निकालना कठिन होता है..," सोहन ने कहा।

"अगले मंगलवार 13 अक्टूबर 2020 को सुबह साढ़े आठ बजे का समय निर्धारित किया जाता है।"

"ठीक है!"

सप्ताह भर प्रतिदिन मेल से, फोन से, व्हाट्सएप्प सन्देश से याद दिलाते रहने का सिलसिला जारी रहा...'भूलिएगा नहीं चिकित्सक से राय लेने की तय दिन-तिथि। सोहन को चिकित्सक की जागरूकता पर अच्छा लग रहा था।

मंगलवार 13 अक्टूबर 2020 की सुबह साढ़े सात बजे सोहन को फोन आया कि आज आपकी साढ़े आठ बजे चिकित्सक से फोन पर बातें होनी तय है उसके लिए एक फार्म भरने की आवश्यकता है। आप बताते जाएँ मैं भरकर आपको मेल कर देता हूँ। फार्म भरने के क्रम में पूछा गया,-"स्वास्थ्य बीमा के बारे में विस्तार से बताएँ..,"

"क्यों ? स्वास्थ्य बीमा से क्या करना है ? चिकित्सक का जो फीस होगा वह मैं जमा कर दूँगा..।""

"चिकित्सक से वर्चुअल गोष्ठी तभी सम्भव है जब आपका स्वास्थ्य बीमा के बारे में हमें जानकारी होगी..।"

"ताकि आपके चिकित्सक महोदय उस राशि के आगे तक मेरा दोहन कर सकें..। मैं चिकित्सक के डकैती को स्थगित करता हूँ।"



4 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15.10.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    ReplyDelete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

पल्लवन

बाड़ छाया की आँगन से वापसी गुल अब्बास सूर्य की छाया स्तुति जल में दृश्य आँखों में आँसू >><< '"दादा ने मुझसे कहा था कि जब...