Tuesday, 27 October 2020

जीवन का गणित

"तुम दोनों बेहद चिंतित दिख रहे हो क्या बात है?" बेटे-बहू से लावण्या ने पूछा।

"मेरा बहुत खास दोस्त कल भारत जा रहा है माँ..,"

"मैं समझ नहीं पा रही हूँ तो इसमें तुमलोगों के परेशान होने की क्या बात है?"

"माँ वह हमेशा के लिए भारत जा रहा है..,"

"इस भयावह काल में उसकी भी नौकरी चली गयी..!" 

"नहीं, माँ! उसे कम्पनी वाले पदोन्नति देकर भारत भेज रहे हैं..,"

 "यह तो सुनहला अवसर है उसके लिए। पुनः अपने देश में व अपनों के बीच होगा। भारत में उसका कौन-कौन हैं, कितने भाई-बहन हैं?"

"वह अबोध था तभी उसके पिता गुज़र गए.., उससे एक छोटा भाई है। उनकी माँ शिक्षिका की नौकरी कर परवरिश की।"

"क्या उसकी माँ छोटे भाई के साथ रहती हैं ?"

"दोनों भाई प्रवासी हैं।"

"तुमलोगों के पौधे से प्रेम करते हुए देखती हूँ तो बहुत अच्छा लगता है। पौधों में फूल लगते देख तुमलोगों के आँखों की चमक देखते बनती है। जब तुमलोगों के लगाए पौधे पेड़ होंगे तो क्या तुमलोग उनकी छाया में बैठना नहीं चाहोगे या फल नहीं खाओगे?"

"मेरी माँ मेरे दोस्त की माँ के लिए बेहद हर्षित है!"



13 comments:

  1. बेहद सुन्दर हृदयस्पर्शी भावाभिव्यक्ति दी !

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (28-10-2020) को   "स्वच्छ रहे आँगन-गलियारा"    (चर्चा अंक- 3868)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 27 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. बहुत सुन्दर सार्थक एवं हृदयस्पर्शी लघुकथा।

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  5. बहुत सुन्दर सार्थक

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  6. बहुत ही सुंदर मन को छूती अभिव्यक्ति दी।
    सादर प्रणाम

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  7. कोमल भावनाओं से भरी सुन्दर अभिव्यक्ति, सरल शब्दों में आप बहुत सुन्दर लिखती हैं - - नमन सह।

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  8. आदरणीया मैम,
    मन को छू लेने वाली अभिव्यक्ति। सच है बच्चे पैसे कमाने के लिए प्रवासी हो जाएँ पर बूढ़े माता पिता तो उनकी छाया को टीआरएस ही जाते हैं. सच कहूँ तो कमाने के लिए विदेश जाने की कोई आवश्यकता भी नहीं, काम तो यहां भी हैं, हम यहां रह कर कमायें तो अपने परिवार को भी सुख देंगे और हमारे देश की उन्नति भी होगी।
    सुंदर लघुकथा के लिए हृदय से आभार व सादर नमन।

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  9. आदरणीया विभा रानी जी, नमस्ते 👏!बहुत सुंदर, मर्मस्पर्शी लघुकथा।हृदय तल से साधुवाद!--ब्रजेन्द्रनाथ

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  10. दिल को छूती कथा।

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