वृद्ध दिवस–
कमरों में पसरा
मकड़जाल।
जीवंत वृद्ध से मिलना कोई नहीं चाहता,
पुण्यतिथि की बेसब्री से प्रतीक्षा होती..।
सर्दियों की एक बेहद सर्द शाम थी। राघव एक आलीशान होटल में से अपनी कम्पनी की कामयाबी का जश्न मनाकर लौट रहा था। रास्ते में चौराहे पर बने भव्य म...
और मकड़ियां मस्त। सच है।
ReplyDeleteबहुत खूब !!!
ReplyDeleteसही कहा आपने...।जीते जी सेवा करें वृद्धों की
ReplyDeleteपुण्यतिथि की क्या जरूरत।