वृद्ध दिवस–
कमरों में पसरा
मकड़जाल।
जीवंत वृद्ध से मिलना कोई नहीं चाहता,
पुण्यतिथि की बेसब्री से प्रतीक्षा होती..।
दिन अपनी अन्तिम देहरी पर ठिठका खड़ा था। पार्क में पुराने नीम के नीचे बैठे लगभग पचहत्तर-सतहत्तर वर्षीय वृद्ध अपने घुटने सहला रहे थे। हर शाम उ...
और मकड़ियां मस्त। सच है।
ReplyDeleteबहुत खूब !!!
ReplyDeleteसही कहा आपने...।जीते जी सेवा करें वृद्धों की
ReplyDeleteपुण्यतिथि की क्या जरूरत।