माँ का अनुपम त्याग है, जीवन उसका राग
मेघ गर्जन—
माँ की सिखलायी
धुन में नाचे
मृण शिल्प में
बोसा जुड़ रहा है—
मातृ दिवस
पहला तारा
माँ सिखला रही है
गाँठ खोलना
वाह
🙏आत्मीय आभार आपका🤝
क्या बात है दीदी! थोड़े शब्द पर ममता का असीम आकाश खुला है उनमें! माँ और संतति का नाता अटूट है! हम सब मांओं को ढेरों बधाई हमारे नाम के अतुल्य दिवस के लिए 🙏🙏
चित्र और रचना दोनों ही हृदय-विजयी हैं।
बहुत खूब,,,,, मां से ही सारा घर संसार है
सुंदर सृजन
आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!
26-07-2026 2+6+0+7+2+0+2+6=25 2+5=7 प्रदर्शनी का आख़िरी दिन, आज सभागार के बीच में चित्रकार ने एक बड़ा-सा दर्पण रख दिया था- भीड़ उसके सामने ज...
वाह
ReplyDelete🙏आत्मीय आभार आपका🤝
ReplyDeleteक्या बात है दीदी! थोड़े शब्द पर ममता का असीम आकाश खुला है उनमें!
ReplyDeleteमाँ और संतति का नाता अटूट है! हम सब मांओं को ढेरों बधाई हमारे नाम के अतुल्य दिवस के लिए 🙏🙏
चित्र और रचना दोनों ही हृदय-विजयी हैं।
ReplyDeleteबहुत खूब,,,,, मां से ही सारा घर संसार है
ReplyDeleteसुंदर सृजन
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