Saturday, 9 June 2012

# विषम परिस्थितियों में #



            







विषम परिस्थितियों में ,
किसी अपने के ....
पीठ पर थपथपाता ,
स्नेहिल हथेली की थाप ....
बेकारी - लाचारी ....
बेबसी -असंतुष्टि ....
असहायता - साधनहीनता में ,
शांति दे जाता .... 
कम कर जाता ,
मानसिक अस्थिरता ....
बनाए रखता ,
स्वाभिमानी हठधर्मिता ....
तो .........................
सख्ती अपने लोगो पर ,
शासित कर संकुचित करती है ....
बेरुखी अपने लोगों की ,
जब बेक़रार करती हैं ....
तल्खिया अपनों की ,
मनोबल को  तार - तार करती हैं ,
तब .................................... 
प्यार की अजब - गजब , 
ख़ुमारी उतारता चला जाता है .... !!

14 comments:

  1. किसी का स्नेहिल साथ हौसले को खत्म नहीं होने देता

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  2. कल 10/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. विवाह की सालगिरह की शुभकामनायें.............

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  4. सच है, मनोबल को बढ़ानेवाला साथ जीवंत रखता है.. और घटानेवाला जीवन-रहित.
    और जो विषम परिस्थितियों में साथ रहे... उससे ही जीवन स्वर्ग है..
    Marriage anniversary ki shubhkaamnayen :)

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  5. विषम परिस्थितियाँ
    सदभावना की ढा़ढस
    लगती है अमृत तुल्य
    और यहीं पहचान होती है
    अच्छे और अनअच्छे की
    सादर

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  6. "बेरुखी अपने लोगों की ,
    जब बेक़रार करती हैं ....
    तल्खिया अपनों की ,
    मनोबल को तार - तार करती हैं ,"

    मनोभावों और परिस्थितियों का सटीक वर्णन! बधाई!

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  7. मनोदशा की व्यथा

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  8. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  9. विषम परिस्थितियों में स्नेहिल थपथपाहट कई गुना हौसला दे जाती है ... सुन्दर अभिव्यक्ति

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  10. किसी का स्नेहिल भरा हाथ...भर देता है एक नई स्फूर्ति ...कर देता है संचार एक नयी ऊर्जा का .....और भर देता है विश्वास ....स्वयं पर !बहुत सुन्दर विभाजी

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  11. बेरुखी अपने लोगों की ,
    जब बेक़रार करती हैं ....
    तल्खिया अपनों की ,
    मनोबल को तार - तार करती हैं ,

    nice line!!!

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