Monday, 17 February 2014
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२६-०६-२०२६ : शून्योपरान्त या लंतरानी?
छोड़ चुकी हूँ समस्याओं पर विचार रखना। हर गाँठ को खोलने की ज़िद में उँगलियाँ ही लहूलुहान होती थीं। अब जो नहीं बदल सकता, उसे समय के हवाले कर द...
छोड़ चुकी हूँ समस्याओं पर विचार रखना। हर गाँठ को खोलने की ज़िद में उँगलियाँ ही लहूलुहान होती थीं। अब जो नहीं बदल सकता, उसे समय के हवाले कर द...
बहुत ही बढ़िया आंटी
ReplyDeleteसादर
गहन फुहार..
ReplyDeleteवाह !
ReplyDeleteबहुत प्रभावी...
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