Friday, 28 February 2020

बलि



कोई रात ऐसी नहीं गुजरती थी , जिस रात उसे स्याह अनुभव ना होता हो । स्याह अनुभव शायद होता नहीं भी हो । क्यों कि विक्षिप्तावस्था में कैसी अनुभूति ।

"एक कट्ठा जमीन मेरे नाम से कर दीजियेगा तो मैं आपकी बेटी को अपने साथ रखने के तैयार हूँ ; वरना मैं चला , आप अपनी बेटी को अपने पास रखिये ।

उसके पति की कही बातों पर नीरा के पिता कोई जबाब देते ; उसके पहले उसकी भाभी चिल्ला पड़ी :- शादी के इतने सालों के बाद धमकी देने से हम डरने वाले नहीं हैं । आपको नीरा को ले भी जाना होगा और हम जमीन देने वाले भी नहीं , आप ही एक दामाद नहीं घर में | अभी एक और मेरी ननद की शादी करनी बाकी है । कल मेरी भी बेटी सयानी होगी । जमीन नहीं दी जायेगी तो नहीं दी जायेगी ।
जमीन नहीं दिए जाने के कारण मायके में ही रहना पड़ा नीरा को ।

जब तक नीरा के माँ बाप जिन्दा रहें , नीरा का पेट भरता रहा । माँ बाप के मृत्यु के बाद उसे उसी शहर के मन्दिर में आश्रय लेना पड़ा । समृद्ध घर के मालिक के पास सैकड़ो एकड़ जमीन थी ।

2 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 28 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. सस्नेहाशीष व असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार छोटी बहना

      Delete

आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!
आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!

विभिन्न स्वतंत्रता

  प्रवासी इन्द्र अपनी यात्रा की यादों को छायांकन के माध्यम से साझा कर रहा था।  "बहुत सुन्दर-सुन्दर तस्वीरें। लेकिन इन तस्वीरों में आपदो...