Friday, 1 July 2022

स्थापना दिवस समारोह

 

[30/06, 5:01 pm] सुधीर जी : *सभी आमंत्रित हैं

*स्वागत है आप सभी का

*३०/६/२२* सायं ५:०० से रात्रि ११:३० व्हाट्सएप्प पटल पर

*एक विशेष आयोजन*:*मगसम के १२ वर्ष* 

***

मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच(मगसम) को इस वर्ष स्थापित हुए 12 वर्ष होने को आए हैं, इस 12 वर्षों में संस्था से  जुड़े सदस्य और पदाधिकारी संस्था के इस लंबे से इतिहास के बारे में क्या सोचते हैं ? उन्हें क्या महसूस होता है? इस पर चर्चा विचार विमर्श किया जाएगा। सभी अपने विचार रख सकेंगे।

वर्ष 2010 से लेकर वर्ष 2022 तक हमने  साहित्य जगत से क्या कुछ खोया, हमने क्या कुछ पाया। इस  संबंध में चर्चा करेंगे।

संस्था के द्वारा इन 12 वर्षों में हजारों के संख्या में देश और विदेश के रचनाकार को *श्रोता और पाठक* के 📗📗आधार पर,उनके शहर गाँव,उन्हीं के जिले में जाकर सम्मानित किया गया है। सभी  सम्मानित रचनाकार अपने विचार आज इस पटल पर रख सकेंगे।

जिन साथियों के पास उन सभी  कार्यक्रमों की दस्तावेज व  फोटोग्राफ होंगे  उन्हें उसे पटल पर रखने का अवसर मिलेगा। अधिकतम 2 फोटो

बहुत सारी बातें होंगी। यह कार्यक्रम 30/6/22 को  सायंकाल 5:00 बजे प्रारंभ होगा और रात्रि 11:30 बजे तक चलेगा।

      इस पटल पर संस्था के 100 से अधिक रचनाकार सदस्य संपूर्ण भारत से हैं हम सभी को एक साथ इस भव्य कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित करते हैं।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले :-

०१/ अनुराग

२०१७ से २०२२ की यादें

०२/ पुस्पेंदर

२०१५ से २०२२ की यादें

०३/ ज्ञांती सिंह 

२०१० से २०२२ की यादें

०४/ सुधीर सिंह सुधाकर 

२०१० से २०२२ की यादें

०५/ वीणा मेदनी 

     2017 से 2022 की यादें 

०६/निर्मला कर्ण 

        2020 से 2022

०१/अंजनी कुमार सुधाकर ०२/अनीता सोनी ०३/केशव चंद्र शुक्ला ०४/गीता सिन्हा गीतांजलि ०५/ज्योति तिवारी ०६/डॉक्टर भूमिका श्रीवास्तव ०७/डॉ रमा बहेड ०८/नवीन जैन ०९/नाथू लाल मेघवाल १०/मदन मोहन शर्मा सजल ११/मोती प्रसाद साहू १२/राजेश तिवारी मक्खन १३/रामबाबू शर्मा राजस्थानी १४/अरुणा रश्मि दीप्त १५/ वीणा मेदनी १६/ शिखा  अरोरा १७/ शिवालिका सिंह कुशवाहा १८/ शोभा पाठक १९/ सरला विजय सिंह सरल २०/ स्वर्ण ज्योति २१/ प्रशांत करण २२/ नरेंद्र परिहार २३/ अजय यादव २४/ अरुणिमा रेखा २५/ अर्चना जैन २६/ अल्पना नागर २७/ आशा जाकड २८/ आशा दिनकर २९/ आशा शर्मा ३०/ इरा जौहरी ३१/ उर्मिला श्रीवास्तव उर्मी ३२/ उषा जैन ३३/ उषा वर्मा वेदना ३४/ कमल किशोर कमल ३५/ कमल पुरोहित ३६/ कविता सिंह ३७/ किरण वैद्य कठिन ३८/ केवरा यदू मीरा ३९/ गिरीश चंद्र ओझा इंद्र ४०/ गीता चौबे गूंज ४१/ चंद्रकला भारतीय ४२/ ज्योति हरी प्रसाद श्रीवास्तव ४३/ डॉ सविता मिश्रा माधवी ४४/ डॉ शशि मंगल ४५/ डॉक्टर त्रिवेणी प्रसाद दूबे मनीष ४६/ डॉक्टर अनिता राज जैन विपुला ४७/ डॉक्टर ज्ञानचंद मर्मज्ञ ४८/ डॉक्टर मंजू रुस्तगी ४९/ डॉ सुधा चौहान राज ५०/ डॉक्टर सुशील शर्मा ५१/ दीप्ति सक्सेना दीप्त ५२/ नरेंद्र कुमार ५३/ नवीन मौर्य ५४/ निर्मला कर्ण ५५/ पुरुषोत्तम शाकद्वीपी ५७/ पूनम शर्मा स्नेहिल ५८/ प्रकाश राय ५९/ प्रवेश स्वरूप खरे ६०/ बी एल नायक ६१/ मधु अरोरा ६२/ मधु दायमा ६३/ योगिता चौरसिया ६४/ रमेशचंद द्विवेदी ६५/ राम हेतार मेघवाल ६६/ रेणु बाला धार ६७/ विद्या कृष्णा ६८/ विनीता निर्झर ६९/ विनोद कुमार हसोड़ा ७०/ विभा रानी श्रीवास्तव, पटना ७१/ शिल्पी भटनागर ७२/ श्रीमती कमल अरोड़ा ७३/ श्रीमती पुष्पा शर्मा ७४/ श्रीमती शशि ओझा ७५/ श्रीमती सरोज सिंह ठाकुर ७६/ रवि प्रकाश वोहरा ७७/ संध्या जावली ७८/ सुरंजना पांडे ७९/ सुशीला वसीटा दामिनी ८०/ स्वीटी गोस्वामी ८१/ मकसूद शाह ८२/हेमचंद सकलानी ८३/ सुषमा सिन्हा ८४/ सीमा गर्ग मंजरी ८५/ नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर ८६/ वीना आडवाणी तन्वी ८७/ अमिता रवि दुबे ८८/ सुधीर श्रीवास्तव ८९/ विनोद कुमार सिल्ला ९०/ नीरू मोहन बागेश्वरी ९१/ कालिका प्रसाद सेमवाल ९२/ सरला विजय सिंह सरल ९३/ डॉक्टर माधवी मिश्रा शुचि ९४/ कृष्णकांत दरौनी ९५/ राजेश्वरी जोशी ९६/ अरुणा अग्रवाल ९७/ विपुल माहेश्वरी ९८/ गीतांजलि वाष्णेय सुयांजलि 

संस्था के वे साथी जो अभी तक जोड़ नहीं पाए हैं । मंच संदेश संचालकों से निवेदन है कि अगर वह उन्हें जोड़ना चाहते हैं ,इस कार्यक्रम में अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें जोड़ें अपने-अपने पटल पर यह संदेशा छोड़ें 4:00 बजे तक उन्हें जोड़ दें।

*विशेष/*

राज्य सरकार द्वारा राजस्थान में कई शहरों में कई जिलों में इंटरनेट सेवा बाधित कर दी गई है इसलिए राजस्थान के कई शहरों से हमारा संपर्क टूटा हुआ है।

             अगर आज संध्या तक इंटरनेट सेवा बहाल नहीं होती है तो यह कार्यक्रम 4 जुलाई 2022 या फिर 7 जुलाई 2022 को पुनः जारी किया जाएगा ताकि राजस्थान के तमाम साथी हमारे इस कार्यक्रम से जुड़ सकें।

अतः इस कार्यक्रम को पार्ट ०१ मान कर हम चलते हैं।

आज के कार्यक्रम के लिए सभी का स्वागत है सभी 4:50 पर कार्यक्रम में सम्मिलित हो जाने के लिए उपस्थित रहें।

अनुराग

[30/06, 5:01 pm] सुधीर माँपेरचना: *मैराथन साहित्यिक मंथन*

आज से हम उस कार्यक्रम का प्रारंभ करने जा रहे हैं, जिसमें साहित्यिक मंथन चिंतन का दौर चलेगा। यह कार्यक्रम 1 जुलाई 2022 से प्रारंभ होकर 15 जुलाई 2022 तक चलेगा।

[30/06, 5:02 pm] सुधीर माँपेरचना: आप सभी को जैसा कि ज्ञात  ही है। मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच की स्थापना वर्ष 2010 में 15 जुलाई के दिन की गई थी।

[30/06, 5:05 pm] सुधीर माँपेरचना: 5 साहित्यकारों को साहित्यिक समारोह में बुलाया गया लगभग डेढ़ हजार किलोमीटर की यात्रा कर कर जब वह दिल्ली पहुंचे तो उनको कार्यक्रम में मंच पर रचना पाठ करने का अवसर नहीं दिया गया।

     प्रेस दीर्घा में उस समय इस संस्था के सभापति जिनकी उम्र इस समय 96 वर्ष है जो इस समय कनाडा में हैं। तथा इस संस्था के राष्ट्रीय संयोजक भारतवर्ष सुधीर सिंह सुधाकर जी उस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

[30/06, 5:08 pm] सुधीर माँपेरचना: उस कार्यक्रम से उन 5 साहित्यकारों को इंडिया गेट लेकर पांच सदस्य पहुंचे सबने उन साहित्यकारों की रचनाओं का रचना पाठ का आनंद लिया उसके बाद भी रचनाकार ट्रेन से अपने शहर को वापस चले गए।

[30/06, 5:08 pm] सुधीर माँपेरचना: एक साहित्यकार की द्वारा एक साहित्यकार की इस तरह से  बेज्जती सभापति जी को बर्दाश्त नहीं हो और उसी क्षण उन्होंने सात ngo की मीटिंग बुलाई और मीटिंग के दौरान 2 घंटे के चर्चा विचार विमर्श के बाद मंजिल ग्रुप  साहित्यिक मंच का गठन कर दिया गया।

[30/06, 5:09 pm] सुधीर माँपेरचना: अगले सात दिनों तक इस संस्था के नियम शर्तें क्या हो इस पर भी चर्चा हुई और तब जाकर 15 जुलाई 2010 को इस संस्था का विधिवत निर्माण किया गया।

[30/06, 5:11 pm] सुधीर माँपेरचना: इस संस्था का पहला कार्यक्रम पटना बिहार में आयोजित हुआ जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय सभापति जी ने की थी।

    उस कार्यक्रम में सबसे पहली रचना मुंशी प्रेमचंद की बूढ़ी काकी कहानी पढ़ी गई थी। जिसे वहां उपस्थित 12 सदस्यों ने📒📒📒📒 पीला कार्ड भी दिया था।📗📗📗📗📗📗26 ने दिया था।📕📕📕लाल कार्ड किसी ने नहीं दिया था।

[30/06, 5:12 pm] सुधीर माँपेरचना: कार्यक्रम में जब हरा कार्ड की महत्ता को लोगों ने अच्छी तरह से जाना तो सभी ने मुंशी प्रेमचंद की रचना को हरा कार्ड ही देना चाहा पर जिन्होंने जो दिया था वही अंकित किया गया और आज तक वहीं अंकित है।

Saturday, 25 June 2022

बकैती


 उसने बताया

ठंढ़ा-ठंढ़ा – कूल-कूल

तेल गमकऊआ/गमकौआ

दर्द निवारक बाम

चेहरा चमकऊआ (फेसपाउडर)

में पिपरमिंट का रस मिला होता है

जो उगा लिया जाता है

गेंहूँ के फसल के कटने और

धान के बीज रोपने के अंतराल में

उस रस के बेचने से मिला धन

शौक को सुगन्धित करता है


उसने बताया

चाहे शाखाएँ जिस ओर फैली हों

जड़ पूर्वजों के जमीन पर होनी चाहिए

किसी छुट्टी में जाकर वह दीवाल खड़ी करेगा

पिता जाकर छत बनवा देंगे

छत होने से 

किसी काज प्रयोजन में जुटने से

उसके भाइयों को अधिक दो चार दिन

गाँव में विचरण करने में संकोच ना होगा


उसने बताया

आकलन करता है

टमाटर आलू प्याज

इतने लाया था इतने दिन पहले

समाप्ति के पहले ले आना है

धरनी की झुंझलाहट का ख्याल रखना है

उसे मज़ा आता है

इन छोटी-छोटी उलझनों को

सुलझाते हुए गुंजारना है

उसने बताया

ना ना उसने जताया

कार्यालय में अति व्यस्तता के बीच

दो चार पल चुरा लेता है

और अपनों को फोन करता है

सबकी खबर रखता है

कुशलमंगल पूछता है

खासकर जो मुझ जैसे बुजुर्ग हैं


बेटे को माँ के स्नेह की तड़प है तो

 माँ को बेटे के कन्धे का सहारा

दूर बैठे के ख्यालों में ख्याल जो है

बिना राजनीतिक बातों को शामिल किए

भाई ने बताया

नेता अपनी पार्टी के प्रति ही वफादार नहीं होते

और हम उन पर भरोसा करके

उनके हाथों में देश और राज्य दे देते।

अब क्या कहें

राजनीत वाले केवल

अपने तोंद के प्रति वफादार होते हैं

वायरल हुए वीडियो तो

खोदो पहाड़ मरल चुहिया भी नहीं निकलती



Sunday, 19 June 2022

स्वस्तिक पर खून के छींटे

 





"कल बिहार बन्द था।"

"कल भारत बन्द है और हमारी वापसी है, न जाने कैसे हालात होंगे..।"

"हालात जो होने चाहिए उसके पसङ्गा भर नहीं हो पा रहा।"

"क्या आपके द्वारा, तोड़-फोड़, आगजनी और देश के सम्पत्ति नष्ट करने को समर्थन देते हुए उचित ठहराया जाना समझ लूँ?"

"आपको क्या लगता है, कथा-कहानी, गीत-कविता लिखने से स्थिति बदल जाने वाली है? लिखते रहिए, कुछ नहीं होने वाला। पचासी साल के बुजुर्ग वकील से डर लगता है...,"

"क्या आपका कहना न्यायसंगत है कि कलम से जंग नहीं लड़ी जा सकती?"

"जरूर लड़ी जा सकती है। लड़ी भी जाती रही है। लेकिन वर्त्तमान काल क्या दुबककर रहने का चल रहा है...!

Wednesday, 15 June 2022

विषाक्तता

 


सिंदूरी सन्ध्या श्यामली निशा को अपना अधिकार सौंप देने ही वाली थी... घरों से निकले अनेकानेक गन्ध-सुगन्ध भुवन में फैल रहे थे। एक तरफ उन घरों में वामाएँ प्रतीक्षारत थीं तो दूसरी तरफ सजी सँवरी अनारकली पोशाक में , झीना घूँघट डाले, पैरों को हिलाते हुए घँघुरओं के स्वर से उतावलापन फैला रही थी। 

"बकरी की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?" सारंगी ने तबले से कहा।

"मनाएगी न ! मनाएगी, बकरी की अम्मा खैर मनाएगी। शहर के धन्नाराम, नए-नए मूँछ वाले बोली में बढ़त लगाते जा रहे हैं.. । बकरे का सौदा जो ऊँची नाक के दिखावे में बदल गया।" तबले ने कहा।

दूर कहीं बज रहा था

न हीरा है न मोती है न चाँदी है न सोना है

नहीं क़ीमत कोई दिल की ये मिट्टी का खिलौना है

Tuesday, 7 June 2022

धर्म : विभा रानीश्री

"हम पशुपतिनाथ मन्दिर जा रहे हैं। क्या आप भी चलेंगे?" अख़्तर से रवि ने पूछा।

नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में भारत से आये प्रतिभागी नेपाल दर्शन को निकले थे।

"मन्दिर के प्रवेश द्वार पर 'गैर हिन्दू का प्रवेश वर्जित' है का बोर्ड लगा हुआ है!" प्रदीप ने कहा

"रमज़ान माह होने के कारण अख़्तर भाई रोजा में हैं... वैसे भी मन्दिर में देवता का स्पर्श हिन्दू को ही कहाँ मिल रहा?" रवि ने तल्खी से कहा।

तभी प्रदीप का फोन टुनटुनाने लगता है और फोन पर बातकर वो बेहद परेशान नजर आता है.. 

"क्या बात है प्रदीप जी आप बेहद घबराए हुए लग रहे हैं...?" अख़्तर ने पूछा।

"मेरी पत्नी को गहरी चोट लग गयी है। अस्पताल में भर्ती करवा दी गयी है। लेकिन उसको खून देना है और अस्पताल में खून मिल नहीं रहा है.."

"किस ग्रुप का खून है ?" अख़्तर ने पूछा

"बी-नेगेटिव," प्रदीप ने कहा।

"ना तो चिन्ता कीजिये और ना चलने में देरी। मेरा भी खून बी-नेगेटिव है..," अख़्तर ने कहा।

"आप गैर हिन्दू भी हैं और रोजा में भी। आप?" रवि ने कहा।

"आप मुझे शर्मिंदा क्यों कर रहे हैं रवि जी..," प्रदीप जी, अख़्तर के पंजों को कसते हुए कहा।

Thursday, 2 June 2022

कोंपल के रक्षक

"क्या इस घर के मालिक को बच्चे पसन्द नहीं थे कि इकलौता बेटा हुआ और उस इकलौते बेटे ने औलाद ही नहीं किया?"अभी फँख फैले नहीं थे लाल-लाल गलफड़ वाले दुधमुँहे चूजे ने माँ चिड़ी से पूछा।

"अरे नहीं रे! मालिक को बच्चे बहुत पसन्द थे। मेरी दादी बताया करती थीं कि ये अपनी ही शादी में आए छोटे-छोटे बच्चों को कप-प्लेट, लैंप-लालटेन के शीशे को फोड़ने पर क्रमानुसार चवन्नी-अठन्नी-रुपया-दो रुपया दिया करते थे।  च च चनाक, ट्टुन ट्टुन टनाक बिखरे किरचों के ढ़ेर पर माँ, बुआ, मामी, चाची, मौसी से डाँट खाने से बेहद प्रफ्फुलित होते।" माँ चिड़ी किस्सा सुना रही थी।

"संयुक्त परिवार के सुख को भोगा पिता-पुत्र अपने पुश्तैनी घर को बाल गृह बना रखा है।"

"मालिक के बेटे के अनुशासन में हमें निश्चिंतता की जिन्दगी मिल जाती है। है न माँ!"

Wednesday, 25 May 2022

अलंकार


लगभग तीन साल से चिकित्सा जगत से दूरी बना रखा था।  इस काल का सदुपयोग चिकित्सक के चक्कर लगाने में करने का निर्णय करते हुए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पहुँच गए। कुछ दिनों से सीने और गले में परेशानी थी।  अच्छा था कि मास्क लगाना अनिवार्य था। चीटीं को भी सरकने में दम घूंट रहा होगा इंसानों के बीच से। पहला दिन जेनरल फिजिशियन ने कार्डियोलॉजी में रेफर कर दिया। भीड़ के कारण नम्बर नहीं लग पाया। दूसरे दिन जाने पर चिकित्सक से भेंट हुई और जाँच शुरू हुआ। एक परेशान हितैसी का प्रवेश हुआ

"इको टेस्ट करवाना है नम्बर लगा दें,"

"जाँच आज नहीं हो सकेगा, कल सुबह आइए।"

"कल डॉक्टर ऑपरेशन करेंगे टेस्ट का रिपोर्ट आज ही चाहिए।"

"आज नहीं हो सकेगा,कह...,"

"लीजिए; डॉक्टर साहब से बात कर लीजिए, इमरजेंसी है।"

"मुझे किसी डॉक्टर से बात नहीं करनी। कल सुबह आइए टेस्ट हो जाएगा ऑपरेशन के पहले रिपोर्ट मिल जाएगा।"

"आप एक बार डॉक्टर...,"

"टेस्ट रिपोर्ट पर डॉक्टर को केवल पुर्जी लिखनी है। वो भी दवा विक्रय प्रतिनिधि के वैसाखी के सहारे...। टेस्ट करने वाले डॉक्टर का काम ज्यादा जोखिम भरा है..,"

Tuesday, 17 May 2022

आखिर क्यों...

 बैसाखी पूनो/बुद्ध पूर्णिमा

छान पर कोंपल

सदाफूली की

"क्या तुमने सुना वज़ू करने वाले स्थान में शिवलिंग मिला है!"

"जब तुम नास्तिक हो तो तुम्हें मन्दिर-मस्जिद से क्या लेना देना; या ऐसा तो नहीं कि तुम्हारा चित्त डगमगाने लगा है, जैसे कम्युनिस्ट से भाजपा समर्थक हो रहे हो? वैसे उपासना स्थल क़ानून कहता है कि भारत में 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थान जिस स्वरूप में था, वह उसी स्वरूप में रहेगा, उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा,"

"सबसे अहम विवाद साल 1809 में हुआ था जिसकी वजह से सांप्रदायिक दंगे भी हुए थे। हिन्द के लिए जो उचित होगा उसको सभी का समर्थन मिलना चाहिए।"

"कैलाश पर्वत-मानसरोवर के लिए हिन्द कब प्रयासरत होगा ?"


छत में सजे

अन्ताक्षरी की गोष्ठी-

ग्रीष्मावकाश

जीत की मस्ती-

झुरनी डंडा संग

पीपनी शोर

Sunday, 24 April 2022

आतिशीलभ्य

 

"ये रे लखिया तू किस मिट्टी की बनी है? तुझे ना तो इस श्मशान बने जगह पर आने में डर लगा और ना मृतक को बटोरने में!"

"मेरा डर उसी समय भाग गया साहब जब युद्ध छिड़ा..।"

"तू इनका करेगी क्या?"

"मुझे भी अपना और अपने जैसों का पेट भरना और तन ढंकना है। मेरे पुस्तक में लिखा है कि वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि इन्सान और जानवरों के टिशू को भी हीरे में बदला जा सकता है।"

"तू इतना क्यों मेहनत कर रही है। तू मेरी बात मान ले तो मैं तुझे अपने घर ले जा सकता हूँ। तेरा पेट भी भरेगा और तन पर भी रेशम चढ़ जाएगा।"

"मेरे तन का रंग ग्रेफाइट है जो क्रुसिबल बनाने में सहायक होता है साहब।और आपका मन..."

Friday, 8 April 2022

आक्षेप


"भादों के अमावस्या की रात से भी ज्यादा काली, गले में नरमुंडों की माला, हाथ में कटा हुआ सिर जिससे खून टपक रहा, पैरों के नीचे आदि मानव को दबाए खड़ी, इतनी भयानक स्त्री की सरंचना?" गीता-सार ने कहा।

"तेरे कृष्ण का विशालकाय शरीर और मुँख से झलकता भुवन। मनुष्य के शरीर को महज एक कपड़े का टुकड़ा बता रहा..।" कालरात्रि ने कहना शुरू किया, "काली सुंदर ही नहीं, सुंदरतम है। स्त्री के दो सत्य रूप है जन्मदात्री और मोक्षदायिनी भी। जानता है माँ को शहद बेहद पसंद है..," कालरात्रि ने कहा।

"जहाँ से जीवन आएगा, वहीं से मृत्यु भी आएगी। आत्मा स्थिर है। न शरीर मनु का है, न मनु शरीर के है। शरीर अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और उनमें ही...,"

"ठहरो-ठहरो..! बिना उनके मर्जी के पत्ता नहीं हिलता न...। तो उनसे कहना अविरल विश्व युद्ध से हम शक्तिहीन हो चुके हैं...।" अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश का समवेत स्वर गूँज उठा और पंचतत्व ने आँखों तथा कानों को बन्द कर लिया।

Wednesday, 6 April 2022

अर्चना


 "अकील का फोन आया था वो बता रहा था कि आज कॉलोनी में अकील की अम्मी आने वाली हैं।" रवि ने कहा।

"सर! अकील सर की अम्मी अपने हाथ से काटा मुर्गा ही खाती हैं, वरना नहीं।" रसोइया ने कहा।

अकील और रवि विद्यार्थी जीवन से मित्र थे। कुछ महीनों पहले ही अकील के स्थान पर रवि स्थानांतरित होकर आया था। अकील उसी शहर का निवासी था। उसके परिवार के सदस्य अक्सर कॉलनी में घूमने आया करते थे।

"ठीक है उनके आने के बाद ही मध्याह्न भोजन बनेगा। उन्हें जैसे जो पसन्द हो वो बना लेना।" कार्यालय के लिए निकलते हुए रवि ने कहा।

"मेमसाहब! साहब को आपने कुछ कहा नहीं।" रसोइया ने रवि की पत्नी ज्योत्स्ना से कहा।

"आपके साहब को क्या कहना था महाराज?" ज्योत्स्ना ने पूछा।

"हमारा नवरात्र चल रहा है.. मेमसाहब!"

"हम उपवास तो कर नहीं रहे हैं,"

"मेमसाहब! नवरात्र करना अलग बात है और पर्व त्योहार में मास-मछली खाना अलग बात है।"

"आप चिन्तामुक्त रहें महाराज! अकील जी की अम्मी के पसन्द का ही भोजन बनेगा। पका मुर्गा कूद कर हमारे मुँह..,"

कुछ देर के बाद अकील की अम्मी ज्योत्स्ना से मिलने आ गयीं। चाय पानी के बाद रसोइया उन्हें मुर्गा काटने के लिए बुलाने आ गया।

"नवरात्र के समय हमारे परिवार में मुर्गा बनना बन्द हो गया है महाराज। वरना मैं इस काल में यहाँ क्यों आती?"

"पहले तो ऐसा नहीं था अम्मी!" रसोइया वर्षो से अकील के साथ भी रहा था।

"हाँ। पहले ऐसा नहीं था। पिछले साल नवरात्र के समय अकील की बड़ी बेटी हिना को बड़ी माता निकल गयी थीं तो..,"



सन्ध्या का आलोक

दिन अपनी अन्तिम देहरी पर ठिठका खड़ा था। पार्क में पुराने नीम के नीचे बैठे लगभग पचहत्तर-सतहत्तर वर्षीय वृद्ध अपने घुटने सहला रहे थे। हर शाम उ...