जिस तरह के शब्द सोचे जाते हैं , वह चेहरे पर उसी भाव के साथ अंकित होता है ... अति साधारण चेहरा सोच से सुंदर और अति सुंदर चेहरा सोच से कुरूप होता है , दीखता है
बहुत सही कहा.....सादर.
यकीनन
सच कह्र रही है सम्प्रेषण के लिये शब्दों के अलावा बॉडी लैंगुअज बहुत कुछ कह जाती है.
आपको कैसा लगा ... यह तो आप ही बताएगें .... !!आपके आलोचना की बेहद जरुरत है.... ! निसंकोच लिखिए.... !!
“भैया ने मुझे तीन लाख रुपये कब दिए?” “यह किसने कहा?” “आपने छोटी भाभी से कहा है न?” “चुग़लीखोर से मैंने सिर्फ़ इतना कहा था कि गृहप्रवेश पर एक...
जिस तरह के शब्द सोचे जाते हैं , वह चेहरे पर उसी भाव के साथ अंकित होता है ... अति साधारण चेहरा सोच से सुंदर और अति सुंदर चेहरा सोच से कुरूप होता है , दीखता है
ReplyDeleteबहुत सही कहा.....
ReplyDeleteसादर.
यकीनन
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